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साधारणीकरण के कारण सहृदय अपने व्यक्तिगत दुख-सुख भूलकर काव्य में लीन हो जाता है।
UGC NET Important MCQ
प्रश्न 1. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए: | सूची-I (आचार्य) सूची-II (दर्शन)
(A) भट्ट लोल्लट (I) शैव दर्शन
(B) श्री शंकुक (II) सांख्य दर्शन
(C) भट्ट नायक (III) मीमांसा दर्शन
(D) अभिनवगुप्त (IV) न्याय दर्शन
विकल्प: (A)-III, (B)-IV, (C)-II, (D)-I
प्रश्न 2. अभिकथन (A): भट्ट नायक ने साधारणीकरण की प्रक्रिया के लिए 'भावकत्व' व्यापार की कल्पना की है।
तर्क (R): साधारणीकरण वह स्थिति है जहाँ पात्र अपनी विशिष्ट सीमाओं को छोड़कर सामान्य बन जाते हैं।
कूट: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
साधारणीकरण वह स्थिति है जहाँ पात्र अपनी विशिष्टता त्यागकर सामान्य बन जाते हैं, और भट्ट नायक ने इसी प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए 'भावकत्व' व्यापार की कल्पना की है।
प्रश्न 3. रस निष्पत्ति के व्याख्याकारों का सही कालक्रम क्या है?
(A) भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट नायक, अभिनवगुप्त
(B) शंकुक, भट्ट लोल्लट, अभिनवगुप्त, भट्ट नायक
(C) भट्ट नायक, शंकुक, भट्ट लोल्लट, अभिनवगुप्त
(D) अभिनवगुप्त, भट्ट नायक, शंकुक, भट्ट लोल्लट
सही उत्तर: (A) भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट नायक, अभिनवगुप्त। ये आचार्य इसी क्रम में भरत मुनि के रस सूत्र के प्रमुख व्याख्याकार माने जाते हैं।
प्रश्न 4. "आलंबनत्व धर्म का साधारणीकरण होता है"—यह कथन किस आलोचक का है?
(A) डॉ. नगेंद्र
(B) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(C) डॉ. श्यामसुंदर दास
(D) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
सही उत्तर: (B) आचार्य रामचंद्र शुक्ल। उन्होंने माना कि आलंबन का साधारणीकरण होता है ताकि वह सबके भाव का आलंबन बन सके।
प्रश्न 5. साधारणीकरण के संदर्भ में 'मधुमती भूमिका' की चर्चा किसने की है?
(A) केशव प्रसाद मिश्र
(B) बाबू गुलाब राय
(C) डॉ. श्यामसुंदर दास
(D) आचार्य विश्वनाथ
सही उत्तर: (C) डॉ. श्यामसुंदर दास। उन्होंने सहृदय के चित्त का साधारणीकरण मानते हुए 'मधुमती भूमिका' के स्पर्श की बात की है।
प्रश्न 6. शंकुक ने अपने अनुमितिवाद की पुष्टि के लिए किस न्याय का सहारा लिया है?
(A) स्थाली-पुलाक न्याय
(B) चित्र-तुरंग न्याय
(C) बीज-अंकुर न्याय
(D) कूप-मंडूक न्याय
सही उत्तर: (B) चित्र-तुरंग न्याय। जिस प्रकार चित्र के घोड़े को वास्तविक मान लिया जाता है, उसी प्रकार सामाजिक नट में पात्र का अनुमान कर लेता है।
प्रश्न 7. रस सूत्र में आए 'संयोग' शब्द का अर्थ 'व्यंग्य-व्यंजक' संबंध किस आचार्य ने माना है?
(A) भट्ट नायक
(B) भट्ट लोल्लट
(C) अभिनवगुप्त
(D) शंकुक
सही उत्तर: (C) अभिनवगुप्त। वे ध्वनिवादी आचार्य थे और उन्होंने स्थायी भाव को व्यंग्य और विभावादि को व्यंजक माना है।
प्रश्न 8. डॉ. नगेंद्र के अनुसार किसका साधारणीकरण होता है?
(A) आलंबन का
(B) कवि की अनुभूति का
(C) सहृदय के चित्त का
(D) आश्रय का
सही उत्तर: (B) कवि की अनुभूति का। डॉ. नगेंद्र का मत है कि साधारणीकरण न तो आलंबन का होता है और न आश्रय का, बल्कि कवि की अनुभूति का होता है।
प्रश्न 9. "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः" सूत्र भरत मुनि के किस ग्रंथ में वर्णित है?
(A) काव्यप्रकाश
(B) साहित्यदर्पण
(C) नाट्यशास्त्र
(D) ध्वन्यालोक
सही उत्तर: (C) नाट्यशास्त्र। यह आचार्य भरत मुनि द्वारा रचित ग्रंथ है जिसमें रस सूत्र का प्रथम बार विवेचन किया गया है।
प्रश्न 10. रस को 'ब्रह्मानंद सहोदर' सर्वप्रथम किसने घोषित किया?
(A) भरत मुनि
(B) अभिनवगुप्त
(C) भट्ट नायक (साधारणीकरण और सत्वोद्रेक के संदर्भ में रसास्वाद को ब्रह्मानंद जैसा माना)
(D) आचार्य विश्वनाथ
सही उत्तर: (C) भट्ट नायक। उन्होंने साधारणीकरण और सत्वोद्रेक की चर्चा करते हुए रसास्वाद को ब्रह्मानंद के समान (सहोदर) माना था। यद्यपि बाद में अभिनवगुप्त और विश्वनाथ ने इसे और अधिक स्पष्ट किया, परंतु इसकी नींव भट्ट नायक ने ही रखी थी।
निष्कर्ष
रस निष्पत्ति और साधारणीकरण भारतीय काव्यशास्त्र के अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं।
इनके माध्यम से हम समझते हैं कि काव्य केवल शब्द नहीं, बल्कि अनुभूति और आनंद का माध्यम है।
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