जामुन का पेड़: कृष्ण चंदर | UGC NET हिंदी इकाई 10 नोट्स एवं MCQ

 

जामुन का पेड़ कृष्ण चंदर UGC NET हिंदी इकाई 10 शॉर्ट नोट्स और MCQ
जामुन का पेड़ — कृष्ण चंदर की प्रसिद्ध व्यंग्य रचना | UGC NET हिंदी इकाई 10


यूजीसी नेट हिन्दी  (इकाई–10): जामुन का पेड़ (कृष्ण चन्दर)


1. रचनाकार परिचय: कृष्ण चन्दर (1914 – 1977)

जन्म: 23 नवंबर 1914, वजीराबाद (गुजरानवाला, पंजाब/वर्तमान पाकिस्तान)।कुछ स्रोतों में जन्म स्थान भरतपुर, राजस्थान भी उल्लिखित है)।

निधन: 8 मार्च 1977, मुंबई (महाराष्ट्)।

प्रारंभिक शिक्षा व पृष्ठभूमि: प्रारंभिक शिक्षा पुंछ (जम्मू-कश्मीर) में हुई। 1934 में फॉरमैन क्रिश्चियन कॉलेज, लाहौर से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। तत्पश्चात् उनका जुड़ाव फिल्म जगत और मुंबई से हो गया।

साहित्यिक विचारधारा: वे प्रगतिशील लेखक संघ (Progressive Writers' Movement) से गहरे जुड़े हुए थे तथा प्रगतिशील व यथार्थवादी दृष्टिकोण के पक्षधर थे।

लेखन विधाएँ व पहचान: यद्यपि उन्होंने उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज और रेडियो नाटक भी लिखे, किंतु उनकी मूल पहचान एक अग्रणी उर्दू-हिन्दी कथाकार के रूप में है।

पुरस्कार एवं सम्मान:पद्म भूषण (भारत सरकार द्वारा, 1969/1961) साहित्य अकादमी पुरस्कार,सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार ।


प्रमुख कृतियाँ:

उपन्यास:

शिकस्त, एक गधे की आत्मकथा, अन्नदाता, हम वहशी हैं, जब खेत जागे, बावन पत्ते, एक वायलिन समुंद्र के किनारे, काग़ज़ की नाव, ज़रगांव की रानी, सड़क वापस जाती है, आसमान रौशन है, मेरी यादों के किनारे।


कहानी-संग्रह: 

एक गिरजा-ए-शिकंद, यूकेलिप्टस की डाली, महालक्ष्मी का पुल, आईने के सामने आदि।


2. 'जामुन का पेड़' - कहानी का सामान्य परिचय एवं पृष्ठभूमि विषय विवरण प्रकाशन वर्ष1960 ई.।

विधा- हास्य-व्यंग्य कहानी / प्रतीकात्मक कथा।

मूल भाषामूलतः उर्दू में रचित, तत्पश्चात् हिन्दी में अत्यंत लोकप्रिय।

मुख्य कथा-स्थलसेक्रेटेरियट (सचिवालय) का लॉन।मूल संवेदना/विषयअकर्मण्य प्रशासनिक कार्यशैली, लालफीताशाही (Red Tapism), नौकरशाही की संवेदनहीनता, दायित्व-मुक्ति की प्रवृत्ति और आम आदमी की त्रासदी।


3. कहानी के पात्र एवं पदानुक्रम (Hierarchy)कहानी में पात्रों का संयोजन प्रशासनिक पदानुक्रम और व्यवस्था का यथार्थ दिखाता है: 

दबा हुआ आदमी (कवि/शायर 'औस'): मुख्य पात्र जो आँधी में गिरे जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता ह। वह 'औस के फूल' गद्य-संग्रह का रचयिता है।

माली: मानवीय संवेदना से युक्त एकमात्र पात्र, जो दबे हुए आदमी को भोजन (दाल-भात/खिचड़ी) कराता है और सहानुभूति रखता है।


सचिवालय के कर्मचारी व अधिकारी (निम्न से उच्च क्रम):

चपरासी, क्लर्क,हेड-क्लर्क ,सुपरिंटेंडेंट,अंडर सेक्रेटरी (अवर सचिव), डिप्टी सेक्रेटरी (उप सचिव),जॉइंट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव), चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव), मिनिस्टर (मंत्री)।


अन्य विशिष्ट पात्र:

साहित्य अकादमी का सचिव: जो दबे आदमी को अकादमी का सदस्य चुनता है, किंतु पेड़ हटाने में असमर्थता जताता है।

प्लास्टिक सर्जन: जो आदमी को काटकर जोड़ने और सर्जरी सफल होने पर भी आदमी के मर जाने की हास्यास्पद रिपोर्ट देता है।

प्रधानमंत्री: जो अंततः पेड़ काटने का आदेश देकर अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी स्वयं लेते हैं।


4. कहानी का क्रमिक घटनाक्रम एवं फाइलों की विभागीय यात्रा:


NTA UGC NET में फाइलों के विभागों का क्रम और उनके तर्कों पर प्रायः प्रश्न पूछे जाते हैं। 

फाइलों का पूरा सफर इस प्रकार है:

[घटना: आँधी से जामुन का पेड़ गिरा] ➔ [वाणिज्य विभाग] ➔ [कृषि विभाग] ➔ [हॉर्टीकल्चर विभाग] 

➔ [मेडिकल विभाग] ➔ [संस्कृति विभाग/साहित्य अकादमी] ➔ [वन विभाग] ➔ [विदेश मंत्रालय] ➔ [प्रधानमंत्री आदेश]


पेड़ का गिरना और प्राथमिक प्रतिक्रिया:

रात में तेज़ आँधी/झक्कड़ से सचिवालय के लॉन में जामुन का फलदार पेड़ गिर जाता है और उसके नीचे एक आदमी दब जाता है।सुबह क्लर्क जामुन के फलों के रसीलेपन और जामुनें खाने की यादों पर अफ़सोस व्यक्त करते हैं, किंतु दबे हुए जीवित मनुष्य की उपेक्षा करते हैं।


वाणिज्य विभाग (Trade Dept.) से कृषि विभाग (Agriculture Dept.):

सुपरिंटेंडेंट स्वयं निर्णय लेने की बजाय फाइल चलाता है। वाणिज्य विभाग कहता है कि पेड़ कृषि विभाग के अधीन है, अतः फाइल कृषि विभाग भेजी जाती है।कृषि विभाग तर्क देता है कि पेड़ वाणिज्य विभाग के लॉन में गिरा है, इसलिए जिम्मेदारी वाणिज्य विभाग की है।


हॉर्टीकल्चर विभाग (उद्यान विभाग):

कृषि विभाग फाइल यह कहकर हॉर्टीकल्चर (उद्यान) विभाग को सौंप देता है कि कृषि विभाग केवल अनाज और खेती-बाड़ी का फैसला करता है, जबकि जामुन एक फलदार पेड़ है।हॉर्टीकल्चर विभाग का सचिव कड़ा जवाब देता है कि देश में 'पेड़ उगाओ' योजना चल रही है, ऐसे में फलदार जामुन के पेड़ को काटने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।


अमानवीय विकल्प (प्लास्टिक सर्जरी):

एक मनचला क्लर्क सुझाव देता है कि पेड़ नहीं काटा जा सकता तो आदमी को धड़ से काटकर दो टुकड़ों में निकाल लिया जाए और प्लास्टिक सर्जरी से जोड़ दिया जाए।


मेडिकल विभाग का प्लास्टिक सर्जन जाँच के बाद रिपोर्ट देता है:

 "प्लास्टिक ऑपरेशन तो हो जाएगा और सफल भी रहेगा, मगर आदमी मर जाएगा।" अतः यह विचार रद्द होता है।


संस्कृति विभाग (Cultural Dept.) एवं साहित्य अकादमी:

दबा हुआ व्यक्ति गालिब का शेर बोलता है:

 "ये तो माना कि तगाफुल न करोगे, लेकिन खाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तक"।इससे उसके कवि होने का पता चलता है। मामला संस्कृति विभाग और साहित्य अकादमी को भेजा जाता है।साहित्य अकादमी का सचिव आकर उसका इंटरव्यू लेता है। पता चलता है कि उसका तखल्लुस 'औस' है और उसका गद्य-संग्रह 'औस के फूल' प्रकाशित हुआ है। सचिव उसे अकादमी का सदस्य चुन लेता है और मरने पर पत्नी को वज़ीफ़ा/पेंशन देने की बात कहता है, पर पेड़ काटने से मना कर देता है क्योंकि उसका विभाग केवल 'संस्कृति' से संबंध रखता है।


वन विभाग (Forest Dept.) व विदेश मंत्रालय (Foreign Affairs):

फाइल वन विभाग को भेजी जाती है। अगले दिन जब वन विभाग के कर्मचारी आरी-कुल्हाड़ी लेकर पहुँचते हैं, तो विदेश मंत्रालय रोक लगा देता है।

कारण: यह पेड़ 10 वर्ष पूर्व 'पिटोनिया' (Petunia) राज्य के प्रधानमंत्री ने सचिवालय के लॉन में लगाया था। पेड़ काटने से पिटोनिया सरकार से अंतर्राष्ट्रीय संबंध बिगड़ने और आर्थिक सहायता रुकने का भय था।


प्रधानमंत्री का आदेश और करुण अंत:

प्रधानमंत्री दौरे से लौटते हैं। विदेश मंत्रालय उनके समक्ष फाइल रखता है। प्रधानमंत्री अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी अपने सिर लेते हुए पेड़ काटने का हुक्म दे देते हैं।शाम 5 बजे सुपरिंटेंडेंट खुशी-खुशी फाइल लेकर कवि के पास पहुँचता है और कहता है कि "आज तुम्हारी फाइल पूरी हो गई।" किंतु तब तक कवि का शरीर ठंडा पड़ चुका था, आँखों की पुतलियाँ बेजान थीं और चींटियों की कतार उसके मुँह में जा रही थी— "उसकी जिंदगी की फाइल मुकम्मल हो चुकी थी।"


5. कहानी का मूल विचार, व्यंग्य व शिल्प विधान लालफीताशाही (Red Tapism) पर प्रहार: 

कहानी यह दिखाती है कि प्रशासनिक व्यवस्था में नियम-कानून और काग़ज़ी औपचारिकताएँ मनुष्य के जीवन से अधिक मूल्यवान मान ली जाती हैं।

विभागों की संवेदनहीनता: प्रशासनिक अधिकारी ज़िम्मेदारी लेने के बजाय उसे एक-दूसरे पर टालते रहते हैं।

हास्य और करुणा की अंतर्धारा: ऊपरी तौर पर कहानी हास्य पैदा करती है (जैसे आदमी को काटने का विचार या पेड़ उगाओ योजना का तर्क), किंतु अंदर ही अंदर एक निरपराध व्यक्ति के तिल-तिल मरने की अत्यंत कारुणिक अंतर्धारा प्रवाहित होती है।

अतिशयोक्ति अलंकार व फैंटेसी शैली: व्यंग्य को तीखा बनाने के लिए लेखक ने घटनाओं को अनुपात से अधिक बढ़ाकर प्रस्तुत किया है।


6. परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण उद्धरण (Key Quotes)

"बेचारा जामुन का पेड़ कितना फलदार था... और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।"

— क्लर्क (संवेदनहीनता का प्रतीक)

"ये तो माना कि तगाफुल न करोगे, लेकिन खाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तक।" —

दबा हुआ आदमी

(मिर्ज़ा गालिब का शेर) "हैरत है, इस समय जब 'पेड़ उगाओ' स्कीम बड़े पैमाने पर चल रही है, हमारे मुल्क में ऐसे सरकारी अफसर मौजूद हैं जो पेड़ काटने की सलाह दे रहे हैं..."

— सचिव, हॉर्टीकल्चर विभाग

"प्लास्टिक ऑपरेशन तो हो जाएगा और सफल भी रहेगा, मगर आदमी मर जाएगा।"

— प्लास्टिक सर्जन (मेडिकल विभाग)

"हमारा विभाग सिर्फ संस्कृति से ताल्लुक रखता है। आपके लिए हमने वन विभाग को लिख दिया है..."

— सचिव, साहित्य अकादमी

"क्या हम इनकी दोस्ती की ख़ातिर एक आदमी की ज़िंदगी को भी क़ुरबान नहीं कर सकते?"

— द्वितीय क्लर्क (विदेश मंत्रालय के संदर्भ में)

"उसकी जिंदगी की फाइल मुकम्मल हो चुकी थी।" — 

कहानी की अंतिम कालजयी पंक्ति (लेखक)


MCQ 

प्रश्न 1. [कथन और कारण (Assertion & Reason)]

कथन (A): 'जामुन का पेड़' कहानी में हास्य के आवरण के नीचे करुणा की गंभीर अंतर्धारा प्रवाहित होती है। 

कारण (R): प्रशासनिक व्यवस्था की संवेदनहीनता और अकर्मण्यता के कारण एक जीवित मनुष्य फाइलों की यात्रा के दौरान अंततः दम तोड़ देता है। (1) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

 (2) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

 (3) (A) सही है, किंतु (R) गलत है। (4) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

उत्तर: (1)व्याख्या: कहानी में हास्यास्पद घटनाएँ (हास्य) केवल नौकरशाही की अमानवीयता और संवेदनहीनता को उभारने का माध्यम हैं; अंततः पाठक करुणा से भर उठता है।


प्रश्न 2. [कूट आधारित - रचनाओं का मिलान]

निम्नलिखित में से कौन-सी रचनाएँ कृष्ण चन्दर द्वारा रचित उपन्यास हैं?

 (i) एक गधे की आत्मकथा 

(ii) शिकस्त 

(iii) महालक्ष्मी का पुल 

(iv) बावन पत्ते 

सही कूट का चयन कीजिए: 

(1) केवल (i) और (ii)

 (2) केवल (i), (ii) और (iv)

 (3) केवल (iii) और (iv) 

(4) उपयुक्त सभी (i, ii, iii, iv)

उत्तर: (2)

व्याख्या: 'एक गधे की आत्मकथा', 'शिकस्त' और 'बावन पत्ते' कृष्ण चन्दर के उपन्यास हैं6। जबकि 'महालक्ष्मी का पुल' उनकी प्रसिद्ध कहानी है।


प्रश्न 3. [सूची मिलान (Matching Pattern)]

सूची-I (विभाग) को सूची-II (संबद्ध तर्क/निर्णय) से सुमेलित कीजिए:

(A) कृषि विभाग(I) पेड़ काटने से पड़ोसी देश से अंतर्राष्ट्रीय संबंध बिगड़ जाएँगे।

(B) हॉर्टीकल्चर विभाग(II) यह मामला अनाज और खेती का नहीं, फलदार वृक्ष का है।

(C) मेडिकल विभाग(III) 'पेड़ उगाओ' योजना के कारण फलदार वृक्ष नहीं काटा जा सकता।

(D) विदेश मंत्रालय(IV) ऑपरेशन सफल रहेगा, परंतु आदमी मर जाएगा।

कूट:(A)-(1)II,III,IV,I

(B)-III,II,IV,I

( C )(3)II,III,I,IV

(D)(4)IV,III,II,I

उत्तर: (1)


प्रश्न 4. [घटनाओं का सही अनुक्रम (Sequence)]'जामुन का पेड़' कहानी में फाइलों के स्थानांतरण के सही अनुक्रम का चयन कीजिए:

 (1) कृषि विभाग , वाणिज्य विभाग , हॉर्टीकल्चर विभाग, संस्कृति विभाग

 (2) वाणिज्य विभाग, कृषि विभाग, हॉर्टीकल्चर विभाग, संस्कृति विभाग, वन विभाग,विदेश मंत्रालय (3) वाणिज्य विभाग, हॉर्टीकल्चर विभाग,कृषि विभाग, वन विभाग, विदेश मंत्रालय

 (4) कृषि विभाग, हॉर्टीकल्चर विभाग, मेडिकल विभाग, संस्कृति विभाग, विदेश मंत्रालय

उत्तर: (2)


प्रश्न 5. [पात्र और वक्तव्य]जामुन के पेड़ के नीचे दबे आदमी ने अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए मिर्ज़ा गालिब का कौन-सा शेर पढ़ा था?

(1) "दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है, आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।" 

(2) "ये तो माना कि तगाफुल न करोगे, लेकिन खाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तक।" 

(3) "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले।"

 (4) "बस कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना।

"उत्तर: (2)


प्रश्न 6. [कथन-आधारित प्रश्न]'जामुन का पेड़' कहानी के संदर्भ में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

 (A) दबे हुए कवि का तखल्लुस 'औस' था और उसकी कृति 'औस के फूल' थी।

 (B) जामुन का पेड़ 'पिटोनिया' राज्य के प्रधानमंत्री ने 10 वर्ष पूर्व रोपा था।

 (C) प्लास्टिक सर्जन ने सफलता पूर्वक ऑपरेशन करके आदमी की जान बचा ली थी।

 (D) अंत में उप-राष्ट्रपति के आदेश से पेड़ को काटा गया।

सही विकल्प का चयन कीजिए: 

(1) केवल (A) और (C) 

(2) केवल (B) और (D) 

(3) केवल (A) और (B) 

(4) (A), (B) और (D)

उत्तर: (3)

व्याख्या: कथन (C) असत्य है क्योंकि ऑपरेशन रद्द कर दिया गया था। कथन (D) असत्य है क्योंकि आदेश प्रधानमंत्री ने दिया था, उप-राष्ट्रपति ने नहीं।


प्रश्न 7. [अवधारणात्मक प्रश्न]

कहानी में 'साहित्य अकादमी के सचिव' के चरित्र की कौन-सी विडंबना उजागर होती है?

 (1) वह साहित्य का विरोधी है और कवि से घृणा करता है।

 (2) वह कवि को अकादमी का सदस्य चुन लेता है और पेंशन देने की घोषणा करता है, किंतु उसे पेड़ के नीचे से निकालने की ज़मीनी मदद नहीं करता।

 (3) वह विदेश मंत्रालय से जाकर तुरंत अनुपति ले आता है।

 (4) वह स्वयं आरी-कुल्हाड़ी लेकर पेड़ काटने पहुँच जाता है।

उत्तर: (2)


प्रश्न 8. [उद्धरण पहचान]

"हैरत है! इतना बड़ा शायर... और कैसे गुमनामी के अंधेरे में दबा पड़ा है!" — यह पंक्ति दबे हुए व्यक्ति के विषय में किसने कही थी?

 (1) हॉर्टीकल्चर विभाग के सेक्रेटरी ने 

(2) सुपरिंटेंडेंट ने 

(3) साहित्य अकादमी के सचिव ने 

(4) विदेश मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी ने

उत्तर: (3)


प्रश्न 9. [बहुविकल्पीय - व्यंग्य का केंद्र]

'जामुन का पेड़' कहानी में किस विदेशी राज्य/देश का उल्लेख अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में आया है?

 (1) सोवेनिया

 (2) पिटोनिया 

(3) एथिनिया 

(4) लाइबेरिया

उत्तर: (2)


प्रश्न 10. [कहानी के निष्कर्ष पर आधारित प्रश्न]

कहानी की अंतिम पंक्ति "उसकी जिंदगी की फाइल मुकम्मल हो चुकी थी" का ध्वन्यार्थ क्या है?

 (1) सरकारी फाइल का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो जाना।

 (2) दबे हुए व्यक्ति की मृत्यु हो जाना और नौकरशाही का अंततः विजयी होना। 

(3) कवि को साहित्य अकादमी की सदस्यता मिल जाना। 

(4) जामुन के पेड़ को सुरक्षित स्थान पर लगा देना।

उत्तर: (2)


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