UGC NET हिंदी इकाई 10: माटी की मूरतें | रामवृक्ष बेनीपुरी | शॉर्ट नोट्स + MCQ

 



UGC NET हिंदी इकाई 10 माटी की मूरतें के लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी शॉर्ट नोट्स और MCQ
UGC NET हिंदी इकाई 10: माटी की मूरतें — रामवृक्ष बेनीपुरी के शॉर्ट नोट्स एवं महत्वपूर्ण MCQ



UGC NET Hindi: 'माटी की मूरतें' (रामवृक्ष बेनीपुरी) – संपूर्ण अध्ययन नोट्स, पात्र विश्लेषण एवं 10 मॉडल प्रश्न

कैप्शन / मेटा विवरण (Meta Description):

NTA UGC NET/JRF हिंदी साहित्य इकाई-10 ('आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ') के अंतर्गत रामवृक्ष बेनीपुरी जी की प्रसिद्ध रचना 'माटी की मूरतें' के पूर्ण नोट्स, 12 रेखाचित्रों का विश्लेषण, महत्वपूर्ण उद्धरण और नवीन पैटर्न पर आधारित 10 बहुविकल्पीय प्रश्न।

प्रस्तावना

NTA UGC NET/JRF हिंदी साहित्य की परीक्षा में इकाई-10 ('आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ') का विशेष महत्व है। इस इकाई में संकलित रेखाचित्र/संस्मरण 'माटी की मूरतें' (लेखक: रामवृक्ष बेनीपुरी) से हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।

यदि आप यूजीसी नेट, सेट (SET), असिस्टेंट प्रोफेसर या टीजीटी/पीजीटी की तैयारी कर रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए वन-स्टॉप गाइड का काम करेगा। इसमें कृति का संक्षिप्त परिचय, प्रकाशन इतिहास, सभी 12 पात्रों का विश्लेषण और परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्न शामिल हैं।

1. 'माटी की मूरतें': एक दृष्टि में (Quick Facts)

लेखक: रामवृक्ष बेनीपुरी (1899 – 1968 ई.)

उपनाम/उपाधि: हिंदी साहित्य में इन्हें "कलम का जादूगर" कहा जाता है।

साहित्यिक विधा: रेखाचित्र / संस्मरण (शब्दचित्र)।

रचना-स्थल: इस कृति के अधिकांश शब्दचित्र स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हजारीबाग सेंट्रल जेल में लिखे गए थे।

समर्पण: यह पुस्तक लेखक ने अपने मामा द्वारिका सिंह जी को समर्पित की है।

मूल विषय-वस्तु: ग्रामीण भारत की माटी से जुड़े आम इंसानों, शोषित व उपेक्षित पात्रों के जीवन-संघर्ष, स्वाभिमान, नैतिक मूल्यों और सहज मानवीय संवेदनाओं का जीवंत एवं मार्मिक चित्रण।



2. प्रकाशन इतिहास एवं संस्करण

प्रथम संस्करण (1946 ई.): इस संस्करण में कुल 11 रेखाचित्र शामिल थे।

द्वितीय संस्करण (1953 ई.): इसमें 'रजिया' नामक नया रेखाचित्र जोड़ा गया और इसे क्रम में प्रथम स्थान दिया गया। इस प्रकार इसमें कुल 12 रेखाचित्र हो गए। यह संस्करण सचित्र प्रकाशित हुआ था।



3. सभी 12 रेखाचित्रों (पात्रों) का विस्तृत विवरण

परीक्षा में अक्सर पात्रों के नाम, उनके व्यवसाय और उनकी विशेषताओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे सभी 12 पात्रों की सूची दी गई है:

रजिया: मनिहारिन (चूड़ी पहनाने वाली), बेनीपुरी जी की बाल-सखी। सौंदर्य, कठोर परिश्रम, ईमानदारी और उच्च नैतिक स्वाभिमान की प्रतिमूर्ति। (1953 के संस्करण में सबसे पहले संकलित)।

बलदेव सिंह: एक 'शेरमर्द' और साहसी पहलवान। अन्याय व शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाला तथा गरीबों का रक्षक।

सरजू भैया: लेखक के मुँहबोले भाई। अत्यधिक उदार, हँसमुख, ज़िंदादिल और परोपकारी स्वभाव के व्यक्ति।

मंगर: लेखक का स्वाभिमानी और हट्टा-कट्टा हलवाहा (किसान)। बाहर से कठोर किंतु अंदर से बेहद कोमल व कर्तव्यनिष्ठ।

रूपा की आजी: गाँव की वृद्ध महिला। पारंपरिक ग्रामीण संस्कारों, अटूट वात्सल्य और जिजीविषा की प्रतिमूर्ति।

देव: लेखक के बचपन का मित्र। अत्यधिक सहनशील चरित्र जो आगे चलकर स्वतंत्रता सेनानी व क्रांतिकारी बना।

बालगोबिन भगत: कबीरपंथी गृहस्थ साधु। कबीर के पदों को गाने वाले, सामाजिक रूढ़ियों के विरोधी जिन्होंने अपनी पतोहू (बहू) से बेटे को मुखाग्नि दिलवाई और उसका पुनर्विवाह कराया।

भौजी: बेनीपुरी जी की भाभी। बाह्य रूप से तीव्र व कठोर, किंतु आंतरिक रूप से अपार ममता और वात्सल्य से भरी महिला।

परमेसर: गाँव का उच्छृंखल चरित्र। नशे का लती और फिजूलखर्च, किंतु दूसरों के जीवन में खुशियाँ बिखेरने वाला पात्र।

बैजू मामा: अपराध और जेल मनोविज्ञान का प्रतिनिधि पात्र। छोटी चोरियों के कारण लगभग 30 वर्षों तक पटना जेल में बंद रहने वाला व्यक्ति।

सुभान खाँ: सच्चे धर्मात्मा मुसलमान और कौमी एकता (सांप्रदायिक सौहार्द) के प्रतीक। लेखक इन्हें 'सुभान दादा' कहते हैं।

बुधिया: गाँव की गरीब, शोषित और उपेक्षित नारी के जीवन संघर्ष को दर्शाने वाला चरित्र।




4. रामवृक्ष बेनीपुरी जी की प्रमुख कालजयी कृतियाँ

संस्मरण/रेखाचित्र: 

लाल तारा (1938), 

माटी की मूरतें (1946), 

गेहूँ और गुलाब (1950), 

मील के पत्थर (1953), 

ज़ंजीरें और दीवारें (1957)।

उपन्यास: पतितों के देश में (1930)।

नाटक: अंबपाली (1946)।

यात्रा-वृत्तांत:

 पैरों में पंख बाँधकर (1952),

 उड़ते चलो उड़ते चलो (1954)।


📺 वीडियो के माध्यम से पढ़ें


‘माटी की मूरतें’ के संपूर्ण अध्ययन, महत्वपूर्ण साहित्यिक तथ्यों और परीक्षा उपयोगी प्रश्नों को विस्तार से समझने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देखें।




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5. यूजीसी नेट (UGC NET) नवीन पैटर्न पर आधारित 10 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. 'माटी की मूरतें' के संदर्भ में सही कथनों का चयन कीजिए:

(A) प्रथम संस्करण (1946 ई.) में 11 रेखाचित्र थे।

(B) 'रजिया' रेखाचित्र को द्वितीय संस्करण में प्रथम स्थान दिया गया।

(C) यह रचना लेखक ने अपने पिता को समर्पित की है।

(D) इसकी रचना हजारीबाग सेंट्रल जेल में हुई थी।

विकल्प:

(1) केवल (A), (B) और (C)

(2) केवल (A), (B) और (D)

(3) केवल (B), (C) और (D)

(4) उपर्युक्त सभी

👉 उत्तर: (2) केवल (A), (B) और (D) 

(व्याख्या: यह पुस्तक मामा द्वारिका सिंह जी को समर्पित है।)




प्रश्न 2. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:

सूची-I (पात्र)

सूची-II (विशेषता)

(A) बालगोबिन भगत

(I) मनिहारिन / चूड़ीहारिन

(B) बैजू मामा

(II) कबीरपंथी साधु

(C) रजिया

(III) पहलवान, गरीबों का मसीहा

(D) बलदेव सिंह

(IV) 30 वर्ष तक पटना जेल में रहे

कूट:

(1) A-II, B-IV, C-I, D-III

(2) A-I, B-II, C-III, D-IV

(3) A-III, B-IV, C-I, D-II

(4) A-II, B-I, C-IV, D-III

👉 उत्तर: (1) A-II, B-IV, C-I, D-III



प्रश्न 3. कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:

कथन (A): 'सुभान खाँ' रेखाचित्र साम्प्रदायिक सौहार्द और मानवीय प्रेम का संदेश देता है।

कारण (R): सुभान खाँ एक कट्टरपंथी व्यक्ति थे जो अन्य धर्मों का आदर नहीं करते थे।

विकल्प:

(1) (A) और (R) दोनों सही हैं।

(2) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।

(3) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।

(4) (A) और (R) दोनों गलत हैं।

👉 उत्तर: (2) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।




प्रश्न 4. 'बालगोबिन भगत' ने सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए कौन-सा ऐतिहासिक कदम उठाया था?

(1) गाँव के जमींदार के खिलाफ विद्रोह करना

(2) अपनी पतोहू से बेटे को मुखाग्नि दिलवाना व पुनर्विवाह का आदेश देना

(3) संन्यास लेकर जंगलों में चले जाना

(4) मंदिर निर्माण करवाना

👉 उत्तर: (2)



प्रश्न 5. बेनीपुरी जी की निम्नलिखित रचनाओं का सही कालानुक्रम क्या है?

(1) लाल तारा ➔ माटी की मूरतें ➔ गेहूँ और गुलाब ➔ मील के पत्थर

(2) माटी की मूरतें ➔ लाल तारा ➔ गेहूँ और गुलाब ➔ मील के पत्थर

(3) गेहूँ और गुलाब ➔ माटी की मूरतें ➔ लाल तारा ➔ मील के पत्थर

(4) मील के पत्थर ➔ लाल तारा ➔ माटी की मूरतें ➔ गेहूँ और गुलाब

👉 उत्तर: (1) लाल तारा (1938) ➔ माटी की मूरतें (1946) ➔ गेहूँ और गुलाब (1950) ➔ मील के पत्थर (1953)



प्रश्न 6. 'माटी की मूरतें' में संकलित 'मंगर' की प्रमुख विशेषता क्या थी?

(1) वह गाँव का पुरोहित था

(2) वह स्वाभिमानी और कर्तव्यनिष्ठ हलवाहा था

(3) वह एक लालची व्यापारी था

(4) वह प्रसिद्ध गायक था

👉 उत्तर: (2)



प्रश्न 7. "क्या आपका अल्लाह पच्छिम में रहता है? वह पूरब क्यों नहीं रहता?" यह बाल-संवाद किस रेखाचित्र से संबंधित है?

(1) बालगोबिन भगत

(2) सुभान खाँ

(3) सरजू भैया

(4) परमेसर

👉 उत्तर: (2) सुभान खाँ




प्रश्न 8. रामवृक्ष बेनीपुरी जी को हिंदी साहित्य में किस नाम से जाना जाता है?

(1) कलम का सिपाही

(2) कलम का जादूगर

(3) भाषा का डिक्टेटर

(4) कठिन काव्य का प्रेत

👉 उत्तर: (2) कलम का जादूगर




प्रश्न 9. 'माटी की मूरतें' के द्वितीय संस्करण (1953 ई.) में जोड़ा गया नया रेखाचित्र कौन-सा था?

(1) रजिया

(2) बुधिया

(3) देव

(4) भौजी

👉 उत्तर: (1) रजिया



प्रश्न 10. 'बैजू मामा' रेखाचित्र किस मुख्य विषय/संवेदना को उजागर करता है?

(1) राजनीतिक दांव-पेच

(2) अपराध और जेल जीवन का मनोविज्ञान

(3) धार्मिक कर्मकांड

(4) किसान आंदोलन

👉 उत्तर: (2) अपराध और जेल जीवन का मनोविज्ञान

निष्कर्ष

रामवृक्ष बेनीपुरी जी की 'माटी की मूरतें' न केवल हिंदी साहित्य की एक अमूल्य धरोहर है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उम्मीद है कि यह विस्तृत ब्लॉग पोस्ट

 आपकी यूजीसी नेट / जेआरएफ की तैयारी में मददगार साबित होगी।

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