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प्रेमचंद घर में (शिवरानी देवी): संपूर्ण परीक्षा उपयोगी नोट्स एवं 10 महत्वपूर्ण MCQ | UGC NET हिंदी इकाई 10
प्रस्तावना
'प्रेमचंद घर में' हिंदी साहित्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण जीवनीपरक कृति है, जिसकी लेखिका मुंशी प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी हैं। इस पुस्तक में प्रेमचंद के साहित्यिक जीवन के साथ-साथ उनके घरेलू, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं का वर्णन मिलता है।
यह कृति UGC NET हिंदी के पाठ्यक्रम की इकाई 10—'आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ'—की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
इस लेख में पुस्तक का परिचय, प्रमुख तथ्य, पारिवारिक पृष्ठभूमि, महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, प्रमुख उद्धरण और नवीन परीक्षा-पद्धति के अनुसार तैयार किए गए 10 महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) प्रस्तुत किए गए हैं।
1. 'प्रेमचंद घर में': मूल परिचय एवं मुख्य तथ्य
- लेखिका: शिवरानी देवी।
- विधा: जीवनी।
- प्रकाशन वर्ष: 1944 ई.
- मुख्य विषय: मुंशी प्रेमचंद का व्यक्तिगत, पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक और साहित्यिक जीवन।
- पाठ्यक्रम: UGC NET हिंदी, इकाई 10—आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ।
- भूमिका: पुस्तक में शिवरानी देवी का आमुख/वक्तव्य शामिल है।
- पुस्तक का स्वरूप: इसमें प्रेमचंद के जीवन से संबंधित अनेक घटनाओं और घरेलू संस्मरणों का वर्णन मिलता है।
- विशेषता: प्रेमचंद के महान साहित्यकार होने के साथ-साथ उनके सहज मानवीय व्यक्तित्व को भी सामने लाना।
पुस्तक में प्रेमचंद को केवल एक महान साहित्यकार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, बल्कि उनके स्वभाव, पारिवारिक जीवन, आर्थिक कठिनाइयों, उदारता, क्रोध, स्वाभिमान और मानवीय कमजोरियों का भी चित्रण मिलता है।
इस प्रकार यह कृति प्रेमचंद के जीवन को निकट से समझने का महत्त्वपूर्ण साधन है।
2. पात्र एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
(क) धनपत राय अर्थात् मुंशी प्रेमचंद
प्रेमचंद इस जीवनी के केंद्रीय चरित्र हैं। उनका वास्तविक नाम धनपत राय था। वे सरल, स्वाभिमानी, उदार और संवेदनशील व्यक्ति थे।
उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
1. सरल और सहज स्वभाव।
2. स्वाभिमान तथा सिद्धांतप्रियता।
3. आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद साहित्य-सृजन के प्रति समर्पण।
4. मित्रों और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रवृत्ति।
5. सामाजिक समस्याओं और शोषित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता।
6. पारिवारिक जीवन में कभी-कभी क्रोध और मतभेद।
7. साहित्य-सृजन के समय गहरी तल्लीनता।
(ख) शिवरानी देवी
शिवरानी देवी प्रेमचंद की दूसरी पत्नी तथा इस पुस्तक की लेखिका थीं। वे बाल-विधवा थीं। प्रेमचंद ने 1906 ई. में उनसे विवाह किया।
उनका विवाह उस समय के सामाजिक संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण कदम था। शिवरानी देवी स्वयं भी स्वाभिमानी, जागरूक, साहसी और स्वतंत्र विचारों वाली महिला थीं।
उन्होंने प्रेमचंद के व्यक्तित्व का चित्रण केवल पत्नी के रूप में प्रशंसा करते हुए नहीं किया, बल्कि उनके घरेलू जीवन की कठिनाइयों, मतभेदों और मानवीय कमजोरियों को भी सामने रखा।
(ग) बच्चे
प्रेमचंद और शिवरानी देवी के परिवार में अमृत राय, श्रीपत राय और कमला का उल्लेख मिलता है।
- अमृत राय: प्रेमचंद के पुत्र तथा 'कलम का सिपाही' के लेखक।
- श्रीपत राय: प्रेमचंद के पुत्र।
- कमला: प्रेमचंद की पुत्री।
(घ) अन्य पारिवारिक पात्र
- मुंशी अजायबराय: प्रेमचंद के पिता।
- आनंदी देवी: प्रेमचंद की माता।
3. मुख्य विषय-वस्तु एवं प्रमुख घटनाक्रम
(क) विवाह और बाल-विधवा की समस्या
शिवरानी देवी ने अपने विवाह के प्रसंग के माध्यम से उस समय के समाज में प्रचलित रूढ़ियों की ओर संकेत किया है।
प्रेमचंद का एक बाल-विधवा से विवाह करना उनके सामाजिक सुधारवादी दृष्टिकोण का परिचायक माना जाता है।
(ख) आर्थिक तंगी और स्वाभिमान
प्रेमचंद को अपने जीवन में अनेक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उनकी साहित्यिक और संपादकीय गतिविधियों में 'माधुरी', 'हंस' तथा 'जागरण' जैसी पत्रिकाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान था। पत्र-पत्रिकाओं के संचालन और प्रकाशन से जुड़ी आर्थिक समस्याओं के बावजूद वे साहित्य-सृजन करते रहे।
वे अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान को महत्त्व देते थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद साहित्य के प्रति उनका समर्पण बना रहा।
(ग) सिनेमा जगत से मोहभंग
आर्थिक कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से प्रेमचंद 1934 ई. में बंबई की अजंता सिनेटोन कंपनी से जुड़े।
वे वहाँ कहानी-लेखन के कार्य से संबंधित रहे। लेकिन फिल्मी दुनिया का व्यावसायिक वातावरण और वहाँ की परिस्थितियाँ उन्हें अनुकूल नहीं लगीं।
फलस्वरूप वे लगभग एक वर्ष के भीतर वापस बनारस लौट आए।
यह प्रसंग प्रेमचंद के जीवन में साहित्यिक आदर्शों और व्यावसायिक आवश्यकताओं के बीच के तनाव को समझने में सहायक है।
(घ) स्वतंत्रता आंदोलन और जेल यात्रा
शिवरानी देवी स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित थीं और उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
उनकी जेल यात्रा का उल्लेख इस पुस्तक के महत्त्वपूर्ण प्रसंगों में किया जाता है। उनके राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों से यह स्पष्ट होता है कि वे केवल एक साहित्यकार की पत्नी नहीं थीं, बल्कि स्वयं भी जागरूक और साहसी व्यक्तित्व की धनी थीं।
शिवरानी देवी की गिरफ्तारी की तिथि और वर्ष के संबंध में स्रोतों में अंतर मिलता है। इसलिए इस तथ्य को परीक्षा में लिखते समय मूल पुस्तक अथवा प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोत से मिलान करना चाहिए।
(ङ) प्रेमचंद का अंतिम समय
प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 ई. को हुआ।
उनके जीवन के अंतिम समय, बीमारी और निधन से संबंधित प्रसंग पुस्तक के अत्यंत मार्मिक हिस्सों में शामिल हैं।
शिवरानी देवी ने अपने पति के अंतिम दिनों का वर्णन संवेदनशीलता के साथ किया है। इससे प्रेमचंद के व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक संबंधों को समझने में सहायता मिलती है।
4. महत्त्वपूर्ण प्रसंग एवं परीक्षा विशेष तथ्य
(क) 'सड़क पर' प्रसंग
पुस्तक से संबंधित अध्ययन-सामग्री में प्रेमचंद की उदारता और गरीबों के प्रति संवेदना को दर्शाने वाले प्रसंगों का उल्लेख मिलता है।
ऐसे प्रसंगों में एक फटेहाल किसान को देखकर प्रेमचंद द्वारा उसकी सहायता करने की घटना का भी उल्लेख किया जाता है।
इस प्रसंग का मुख्य आशय प्रेमचंद की मानवीय संवेदना और जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति को स्पष्ट करना है।
(ख) 'हंस' पत्रिका और आर्थिक कठिनाइयाँ
प्रेमचंद साहित्यिक गतिविधियों और पत्रिका-संपादन के लिए समर्पित थे।
'हंस' पत्रिका उनके साहित्यिक जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा थी। पत्रिका के संचालन में आर्थिक कठिनाइयाँ आने के बावजूद साहित्यिक कार्य के प्रति उनका लगाव बना रहा।
उनके इस व्यवहार से साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता और आदर्शवाद का परिचय मिलता है।
(ग) महात्मा गांधी से मुलाकात और सरकारी नौकरी का त्याग
1920 ई. में गोरखपुर में महात्मा गांधी के भाषण से प्रभावित होकर प्रेमचंद ने राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाया।
असहयोग आंदोलन के प्रभाव में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया।
यह घटना उनके जीवन में देशभक्ति, राष्ट्रीय चेतना और व्यक्तिगत त्याग के महत्त्व को स्पष्ट करती है।
परीक्षा के लिए ध्यान रखें: प्रेमचंद के नौकरी छोड़ने का प्रसंग उनके राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव का महत्त्वपूर्ण प्रमाण है।
5. परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण उद्धरण एवं कथन
UGC NET हिंदी में कथनों, लेखक-पहचान, कथन-स्रोत तथा विचारों के मिलान पर आधारित प्रश्न उपयोगी होते हैं।
इस दृष्टि से निम्नलिखित कथन अध्ययन-सामग्री में दिए जाते हैं। इन्हें मूल पुस्तक अथवा प्रमाणित उद्धरण-संग्रह से मिलाकर याद करना उचित होगा।
1. "तुम तो हर बात में आदर्श ढूँढ़ती हो, और मैं हर बात में यथार्थ।"
— प्रेमचंद के नाम से उद्धृत।
2. "साहित्यकार देशभक्ति और राजनीति के पीछे चलने वाली सच्चाई नहीं, बल्कि उसके आगे मशाल दिखाती हुई चलने वाली सच्चाई है।"
— प्रेमचंद के साहित्यिक एवं वैचारिक दृष्टिकोण से संबंधित प्रसिद्ध कथन।
3. "मुझे रुपया नहीं चाहिए, मुझे काम चाहिए। रुपया तो हाथ का मैल है।"
— प्रेमचंद के नाम से उद्धृत।
4. "तुम्हारे जेल जाने से मेरा सिर ऊँचा हो गया है।"
— शिवरानी देवी की जेल यात्रा के प्रसंग से संबंधित कथन के रूप में उद्धृत।
5. "साहित्य का बाजार आजकल बहुत मंदा है, पर मैं कलम का मजदूर हूँ, लिखे बिना रह नहीं सकता।"
— प्रेमचंद के नाम से उद्धृत।
फ्रि पीडीएफ डाउनलोड करें लिंक नीचे दिया है।
https://drive.google.com/file/d/1XctWtdVGPDge2At3wIC1iChvK_AnRb17/view?usp=drivesdk
6. UGC NET हिंदी: 'प्रेमचंद घर में' पर आधारित MCQ
नीचे दिए गए प्रश्नों में अभिकथन-तर्क, कथन-आधारित प्रश्न, कालक्रम, सुमेलन तथा सही-गलत कथन जैसी श्रेणियाँ शामिल हैं।
ये प्रश्न अभ्यास के लिए तैयार किए गए हैं।
प्रश्न 1. अभिकथन एवं तर्क
नीचे दो कथन दिए गए हैं—एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): 'प्रेमचंद घर में' में शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व को किसी पूर्वाग्रह या अतिशयोक्ति से मुक्त रखकर अत्यंत स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत किया है।
तर्क (R): एक अर्धांगिनी के रूप में उन्होंने प्रेमचंद की महानता को स्थापित करने के लिए उनके घरेलू जीवन की हर विसंगति और कमी पर पर्दा डालने का प्रयास किया है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।
A. (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
B. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
C. (A) सही है, किंतु (R) असत्य है।
D. (A) असत्य है, किंतु (R) सही है।
संकेत: विचार कीजिए कि क्या शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के गुस्से, आर्थिक तंगी और पारिवारिक मतभेदों को छिपाया है या उन्हें निष्पक्षता से उजागर किया है।
सही उत्तर: C. (A) सही है, किंतु (R) असत्य है।
व्याख्या: शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व के अनेक मानवीय पक्षों को सामने रखा है। उन्होंने उनके घरेलू जीवन की कठिनाइयों और मतभेदों को भी स्थान दिया। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि उन्होंने प्रेमचंद की कमियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया।
प्रश्न 2. कथन-आधारित प्रश्न
निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए।
कथन I: 'प्रेमचंद घर में' पुस्तक का प्रकाशन वर्ष 1944 ईस्वी में हुआ था, जिसमें प्रेमचंद के जीवन के अंतरंग और घरेलू पहलुओं का उद्घाटन है।
कथन II: इस कृति में शिवरानी देवी ने केवल प्रेमचंद के साहित्यिक मित्रों, जैसे जैनेंद्र और प्रसाद, के साथ उनके पत्राचार को ही आधार बनाया है।
उपरोक्त कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए।
A. कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
B. कथन I सत्य है, किंतु कथन II असत्य है।
C. कथन I असत्य है, किंतु कथन II सत्य है।
D. कथन I और कथन II दोनों असत्य हैं।
संकेत: सोचिए कि क्या यह पुस्तक केवल पत्रों का संकलन है या शिवरानी देवी के अपने गृह-जीवन के संस्मरणों का दस्तावेज है।
सही उत्तर: B. कथन I सत्य है, किंतु कथन II असत्य है।
व्याख्या: पुस्तक का प्रथम प्रकाशन 1944 ई. में हुआ था। इसमें प्रेमचंद के निजी, पारिवारिक और साहित्यिक जीवन से संबंधित अनेक घटनाएँ मिलती हैं। इसे केवल साहित्यिक मित्रों के पत्राचार का संकलन मानना गलत होगा।
प्रश्न 3. घटनाओं का कालक्रम
शिवरानी देवी द्वारा रचित 'प्रेमचंद घर में' में वर्णित प्रसंगों/घटनाओं का कालक्रमानुसार सही अनुक्रम क्या है?
(i) प्रेमचंद द्वारा सरकारी नौकरी से इस्तीफा देना।
(ii) 'हंस' पत्रिका का आरंभ और उससे जुड़ी आर्थिक परेशानियाँ।
(iii) बनारस में शुरुआती संघर्ष और शिक्षण कार्य।
(iv) प्रेमचंद की अंतिम बीमारी और देहांत।
सही कूट का चयन कीजिए।
A. (i), (iii), (ii), (iv)
B. (i), (ii), (iii), (iv)
C. (iii), (i), (ii), (iv)
D. (iii), (ii), (i), (iv)
संकेत: प्रेमचंद के जीवन के शुरुआती दौर से लेकर राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान नौकरी त्यागने और बाद के प्रकाशन कार्यों को व्यवस्थित कीजिए।
सही उत्तर: C. (iii), (i), (ii), (iv)।
व्याख्या: शुरुआती संघर्ष और शिक्षण कार्य प्रेमचंद के जीवन के आरंभिक चरण से संबंधित हैं। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के प्रभाव में सरकारी नौकरी छोड़ी। 'हंस' के प्रकाशन और उससे जुड़ी आर्थिक कठिनाइयों का दौर इसके बाद आता है। अंत में उनकी बीमारी और निधन का प्रसंग आता है।
प्रश्न 4. सुमेलन
सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।
सूची-I (प्रसंग)
A. प्रेमचंद का स्वभाव
B. आर्थिक संकट
C. साहित्य-सृजन
D. सामाजिक सरोकार
सूची-II (विवरण)
1. उपन्यास लिखते समय तल्लीनता और बाह्य जगत से बेखबर रहना।
2. घर की तंगी के बावजूद अतिथियों का स्वागत करना।
3. सरल, संतोषी किंतु स्वाभिमानी और कभी-कभार क्रोधी होना।
4. दलितों और शोषितों के प्रति अगाध संवेदना रखना।
सही विकल्प का चयन कीजिए।
A. A-3, B-2, C-1, D-4
B. A-1, B-3, C-2, D-4
C. A-3, B-1, C-4, D-2
D. A-2, B-3, C-1, D-4
संकेत: प्रेमचंद के चरित्र की सरलता, उनकी लेखन-एकाग्रता तथा घर पर मेहमाननवाजी से जुड़े संस्मरणों का मिलान कीजिए।
सही उत्तर: A. A-3, B-2, C-1, D-4।
व्याख्या:
- A-3: प्रेमचंद सरल, स्वाभिमानी और कभी-कभी क्रोध करने वाले व्यक्ति थे।
- B-2: आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अतिथियों का स्वागत करना उनकी उदारता को दर्शाता है।
- C-1: लेखन के समय उनकी तल्लीनता साहित्य के प्रति समर्पण को दिखाती है।
- D-4: दलितों और शोषितों के प्रति संवेदना उनके सामाजिक सरोकारों का परिचायक है।
प्रश्न 5. असत्य कथन की पहचान
'प्रेमचंद घर में' पुस्तक के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
A. इसमें प्रेमचंद के गांधीवादी आंदोलन से जुड़ाव और असहयोग आंदोलन के प्रभाव का चित्रण है।
B. शिवरानी देवी ने प्रेमचंद की रचना-प्रक्रिया और उनके कथा-पात्रों के वास्तविक स्रोतों पर प्रकाश डाला है।
C. यह पुस्तक प्रेमचंद द्वारा स्वयं लिखी गई आत्मकथा है, जिसे बाद में शिवरानी देवी ने संपादित किया।
D. इसमें प्रेमचंद की उदारता, सादगी और पारिवारिक जीवन के अंतर्विरोधों का यथार्थ चित्रण है।
संकेत: ध्यान दीजिए कि 'प्रेमचंद घर में' प्रेमचंद की स्वयं लिखी आत्मकथा है या उनकी पत्नी द्वारा रचित जीवनी।
सही उत्तर: C. यह पुस्तक प्रेमचंद द्वारा स्वयं लिखी गई आत्मकथा है, जिसे बाद में शिवरानी देवी ने संपादित किया।
व्याख्या: यह प्रेमचंद की आत्मकथा नहीं, बल्कि उनकी पत्नी शिवरानी देवी द्वारा लिखी गई जीवनी है। इसमें प्रेमचंद के जीवन के अनेक घरेलू और व्यक्तिगत प्रसंगों का वर्णन मिलता है।
प्रश्न 6. अभिकथन एवं तर्क
नीचे दो कथन दिए गए हैं—एक को अभिकथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।
अभिकथन (A): प्रेमचंद अपने मित्रों और जरूरतमंदों की मदद करने में हमेशा आगे रहते थे, चाहे इसके लिए उन्हें स्वयं कर्ज क्यों न लेना पड़े।
तर्क (R): शिवरानी देवी ने इसका कई स्थानों पर विरोध किया है, क्योंकि इस असीम उदारता के कारण उनके परिवार को अक्सर गंभीर आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था।
उपरोक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए।
A. (A) सही है, किंतु (R) असत्य है।
B. (A) असत्य है, किंतु (R) सही है।
C. (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
D. (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
संकेत: प्रेमचंद की परोपकारिता और शिवरानी देवी के व्यावहारिक तथा पारिवारिक दृष्टिकोण के बीच के तनाव को याद कीजिए।
सही उत्तर: D. (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
व्याख्या: प्रश्न में प्रेमचंद की उदारता और उससे उत्पन्न पारिवारिक आर्थिक तनाव को परस्पर संबंधित माना गया है। दोनों कथन इस संदर्भ में सही माने गए हैं और दूसरा कथन पहले के पीछे की परिस्थिति को स्पष्ट करता है।
नोट: प्रश्न में प्रयुक्त 'हमेशा' और 'कई स्थानों पर' जैसे व्यापक दावों की पुष्टि के लिए मूल पुस्तक के संबंधित प्रसंग देखना उचित होगा।
प्रश्न 7. कथन-आधारित प्रश्न
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन I: 'प्रेमचंद घर में' में प्रेमचंद की आर्थिक विपन्नता के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान और किसी के आगे हाथ न फैलाने के स्वभाव का जीवंत वर्णन मिलता है।
कथन II: इस कृति में शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के फिल्मी दुनिया (बंबई) जाने और वहाँ के कड़वे अनुभवों का भी प्रामाणिक विवरण दिया है।
उपरोक्त कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए।
A. कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
B. कथन I सत्य है, किंतु कथन II असत्य है।
C. कथन I असत्य है, किंतु कथन II सत्य है।
D. कथन I और कथन II दोनों असत्य हैं।
संकेत: प्रेमचंद के जीवन के अंतिम चरण से पहले बंबई की फिल्मी दुनिया में जाने और वहाँ की व्यावसायिकता से उनका मोहभंग होने के प्रसंग को याद कीजिए।
सही उत्तर: A. कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
व्याख्या: प्रेमचंद के जीवन में आर्थिक कठिनाइयाँ और आत्मसम्मान दोनों महत्त्वपूर्ण थे। बंबई में फिल्म-लेखन से जुड़ने का प्रसंग भी उनके जीवन की परिस्थितियों को समझने में सहायक है।
प्रश्न 8. सुमेलन
सूची-I (घटना/प्रसंग) को सूची-II (उसके प्रभाव/अर्थ) के साथ सुमेलित कीजिए।
सूची-I
A. सरकारी नौकरी छोड़ना
B. प्रेस चलाना (सरस्वती प्रेस)
C. बच्चों का लालन-पालन व गृहस्थी
D. साहित्यकारों का घर आना
सूची-II
1. आर्थिक हानि और परेशानियों का कारण बनना।
2. देशभक्ति और राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति समर्पण।
3. घर में चहल-पहल और बौद्धिक चर्चाओं का दौर।
4. शिवरानी देवी द्वारा घरेलू प्रबंधन में संघर्ष।
सही विकल्प चुनिए।
A. A-1, B-2, C-3, D-4
B. A-2, B-1, C-4, D-3
C. A-2, B-3, C-1, D-4
D. A-4, B-1, C-2, D-3
संकेत: प्रेस के व्यावसायिक घाटे, असहयोग आंदोलन में नौकरी त्यागने तथा घर पर आने-जाने वाले अतिथियों के प्रभाव को ध्यान में रखिए।
सही उत्तर: B. A-2, B-1, C-4, D-3।
व्याख्या:
- A-2: सरकारी नौकरी छोड़ना राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति समर्पण का संकेत है।
- B-1: प्रेस चलाने से आर्थिक कठिनाइयाँ और परेशानियाँ उत्पन्न हुईं।
- C-4: बच्चों का पालन-पोषण और गृहस्थी संभालना शिवरानी देवी के लिए जिम्मेदारियों से भरा कार्य था।
- D-3: साहित्यकारों के घर आने से बौद्धिक चर्चाओं और साहित्यिक गतिविधियों का वातावरण बनता था।
प्रश्न 9. शिवरानी देवी की दृष्टि
'प्रेमचंद घर में' के संबंध में शिवरानी देवी की दृष्टि की मुख्य विशेषता क्या है?
A. पारंपरिक पतिव्रता पत्नी की तरह केवल स्तुति करना और कमियों को पूरी तरह छिपाना।
B. प्रेमचंद की साहित्यिक असफलताओं पर कड़ा प्रहार करना और आलोचना करना।
C. एक जागरूक और स्वाभिमानी जीवनसंगिनी के रूप में यथार्थवादी और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना।
D. प्रेमचंद को एक अलौकिक संत के रूप में प्रस्तुत करना, जिनसे कभी कोई मानवीय त्रुटि न हुई हो।
संकेत: शिवरानी देवी ने एक पत्नी होने के साथ-साथ एक स्वतंत्रचेता और व्यावहारिक महिला के रूप में प्रेमचंद के जीवन का मूल्यांकन किस रूप में किया है, इस पर विचार कीजिए।
सही उत्तर: C. एक जागरूक और स्वाभिमानी जीवनसंगिनी के रूप में यथार्थवादी और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना।
व्याख्या: शिवरानी देवी ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व का चित्रण करते समय उनके गुणों के साथ-साथ मानवीय कमजोरियों और पारिवारिक जीवन के अंतर्विरोधों को भी सामने रखा। यही इस कृति की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
प्रश्न 10. कथन-आधारित प्रश्न
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
कथन I: 'प्रेमचंद घर में' केवल एक संस्मरण नहीं है, बल्कि हिंदी में जीवनी और संस्मरण साहित्य की एक मील का पत्थर कृति है।
कथन II: इस पुस्तक से हमें प्रेमचंद के कथा-साहित्य (कहानियों और उपन्यासों) के पात्रों तथा उनके जीवन-यथार्थ के बीच अंतरसंबंधों को समझने के महत्त्वपूर्ण सूत्र मिलते हैं।
उपरोक्त कथनों के आधार पर सही विकल्प का चयन कीजिए।
A. कथन I सत्य है, किंतु कथन II असत्य है।
B. कथन I असत्य है, किंतु कथन II सत्य है।
C. कथन I और कथन II दोनों असत्य हैं।
D. कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
संकेत: विचार कीजिए कि क्या लेखक के घरेलू जीवन और उनकी रचनाओं, जैसे 'गोदान' और 'सेवासदन', के पात्रों में कोई वैचारिक या वास्तविक समानता थी, जिसे शिवरानी देवी के संस्मरणों से समझने में सहायता मिलती है।
सही उत्तर: D. कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
व्याख्या: 'प्रेमचंद घर में' हिंदी की महत्त्वपूर्ण जीवनीपरक कृतियों में गिनी जाती है। इसमें प्रेमचंद के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक अनुभवों का विवरण मिलता है। इन अनुभवों के अध्ययन से उनके साहित्यिक व्यक्तित्व और रचनात्मक दृष्टि को समझने में सहायता मिल सकती है।
हालाँकि किसी विशेष कथा-पात्र को किसी वास्तविक व्यक्ति पर आधारित मानने से पहले अलग से प्रमाण देखना चाहिए।
7. सभी प्रश्नों की उत्तरमाला
प्रश्न संख्या| सही उत्तर| प्रमुख विषय
1| C| अभिकथन एवं तर्क
2| B| प्रकाशन वर्ष एवं विषय-वस्तु
3| C| घटनाओं का कालक्रम
4| A| सुमेलन
5| C| असत्य कथन
6| D| अभिकथन एवं तर्क
7| A| आर्थिक संघर्ष एवं फिल्मी जीवन
8| B| सुमेलन
9| C| लेखिका की दृष्टि
10| D| कृति का साहित्यिक महत्त्व
8. UGC NET हिंदी परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य
पुनरावृत्ति के लिए निम्नलिखित तथ्यों को विशेष रूप से याद रखें—
1. कृति: प्रेमचंद घर में।
2. लेखिका: शिवरानी देवी।
3. विधा: जीवनी।
4. प्रथम प्रकाशन: 1944 ई.
5. जीवनी का केंद्रीय चरित्र: मुंशी प्रेमचंद।
6. प्रमुख विषय: प्रेमचंद का घरेलू, पारिवारिक, आर्थिक और साहित्यिक जीवन।
7. प्रमुख विशेषता: प्रेमचंद के सहज मानवीय व्यक्तित्व का चित्रण।
8. राष्ट्रीय आंदोलन: प्रेमचंद और शिवरानी देवी के राष्ट्रीय चेतना से जुड़े प्रसंग।
9. आर्थिक संघर्ष: पत्रिका-संपादन, प्रकाशन और प्रेस से जुड़ी कठिनाइयाँ।
10. सिनेमा जगत: बंबई में फिल्म-लेखन से जुड़ने का प्रसंग।
11. अंतिम समय: प्रेमचंद का निधन 8 अक्टूबर 1936 ई. को हुआ।
12. परीक्षा की दृष्टि से: लेखिका, विधा, प्रकाशन वर्ष, प्रमुख प्रसंग और कृति की विशेषताएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
निष्कर्ष
'प्रेमचंद घर में' केवल प्रेमचंद के जीवन की घटनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्षों को समझने का एक महत्त्वपूर्ण माध्यम भी है।
शिवरानी देवी ने अपने जीवनसाथी के संघर्षों, आदर्शों, आर्थिक कठिनाइयों, सामाजिक सरोकारों और पारिवारिक जीवन का वर्णन किया है। यही कारण है कि यह कृति हिंदी जीवनीपरक साहित्य में विशिष्ट स्थान रखती है।
UGC NET हिंदी की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को इस पुस्तक के लेखक, विधा, प्रकाशन वर्ष, प्रमुख घटनाओं तथा साहित्यिक महत्त्व का व्यवस्थित अध्ययन करना चाहिए।
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