हिंदी एकांकी, रंगमंच और नुक्कड़ नाटक: उद्भव, विकास और महत्वपूर्ण पड़ाव
हिंदी साहित्य में नाटक की परंपरा अत्यंत प्राचीन है, किंतु एकांकी (One-act play), लोक रंगमंच और नुक्कड़ नाटक ने आधुनिक युग में सामाजिक और राजनीतिक चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूजीसी नेट (UGC NET) की दृष्टि से इन विधाओं का कालक्रम और उनके रचनाकारों का ज्ञान अनिवार्य है।
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1.हिंदी एकांकी:
स्वरूप और विकास के चरण
एकांकी का अर्थ है 'एक अंक वाला नाटक'। इसकी प्रमुख विशेषता संकलनत्रय (स्थान, समय और घटना की एकता) और प्रभाव की एकाग्रता है।
विकास के प्रमुख चरण:
प्रथम चरण (भारतेंदु युग):
इसे हिंदी एकांकी का 'अव्यवस्थित' प्रारंभिक काल माना जाता है।
द्वितीय चरण (प्रसाद युग):
इसकी शुरुआत जयशंकर प्रसाद के 'एक घूँट' (1929) से मानी जाती है।
तृतीय चरण (1938 से):
'हंस' पत्रिका के 'एकांकी नाटक विशेषांक' (मई 1938) से इसका उत्कर्ष काल शुरू होता है।
चतुर्थ चरण:
डॉ. रामकुमार वर्मा के 'रेशमी टाई' (1941) से शिल्प की प्रौढ़ता का युग शुरू हुआ।
2. प्रमुख एकांकीकार और उनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ (प्रकाशन वर्ष सहित)
एकांकीकार-भारतेंदु हरिश्चंद्र
अंधेर नगरी-1881
इसे प्रथम नुक्कड़ नाटक भी माना जाता है
जयशंकर प्रसाद -एक घुंट-1929
आधुनिक एकांकी के लक्षणों वाली प्रथम रचना
भुवनेश्वर प्रसाद -कारवाँ (संग्रह)-1935
पाश्चात्य शिल्प (ब्रेख्त/इब्सन) का प्रभाव
ताँबे के कीड़े, स्ट्राइक
बेमानी (Absurd) एकांकी की शुरुआत
डॉ. रामकुमार वर्मा -पृथ्वीराज की आँखें-1938
'हिंदी एकांकी के जनक' माने जाते हैं
रेशमी टाई-1941
आदर्शवादी और ऐतिहासिक विषयों पर बल
कौमुदी महोत्सव, दीपदान
ऐतिहासिक एकांकी
जगदीशचंद्र माथुर-भोर का तारा-1946
ऐतिहासिक और सामाजिक एकांकी
रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला
सामाजिक व्यंग्य -उपेंद्रनाथ अश्क- लक्ष्मी का स्वागत
-
मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ
देवताओं की छाया में-1940
मनोवैज्ञानिक चित्रण
अधिकार का रक्षक-1938
सामाजिक चेतना
जोंक, तौलिये, छठा बेटा
व्यंग्य प्रधान
डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल-ताजमहल के आँसू-1950
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि-पर्वत के पीछे-1952
सामाजिक यथार्थ-नाटक बहुरंगी-1961
लोक-नाट्य शैली का प्रयोग-दूसरा दरवाजा-1972
आधुनिक शिल्प -उदयशंकर भट्ट-10,000, स्त्री का हृदय
सामाजिक समस्याएं
विष्णु प्रभाकर-संस्कार और भावना
-
मनोवैज्ञानिक यथार्थ-भगवतीचरण वर्मा -सबसे बड़ा आदमी
व्यंग्य
हिंदी नाटक उद्भव और विकास लिंक 👇
https://bharatshikshamitra.blogspot.com/2026/04/blog-post_14.html
3. हिंदी का लोक रंगमंच (Lok Rangmanch)
लोक रंगमंच जनसामान्य की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है जो क्षेत्रीय भाषाओं में रची जाती है।
प्रमुख रूप:
रामलीला, रासलीला, नौटंकी, स्वांग, नकल, खयाल, यात्रा, तमाशा और नाचा।
माच (Maach):
यह मालवा (उज्जैन) का प्रमुख लोक नाट्य है। इसकी शुरुआत गुरु गोपालजी ने की थी।
विशेषता:
इसमें दर्शक और अभिनेता के बीच की दूरी कम होती है और यह खुले मंच पर खेला जाता है।
4. नुक्कड़ नाटक (Street Play)
नुक्कड़ नाटक सड़कों और चौराहों पर जनसामान्य की समस्याओं को उठाने वाली विधा है।
इतिहास:
भारत में नुक्कड़ नाटक का वर्तमान स्वरूप लगभग 50-60 साल पुराना है। भारतेंदु की 'अंधेर नगरी' (1881) को इस शैली का पहला नाटक माना जा सकता है।
सफ़दर हाशमी और 'जनम':
नुक्कड़ नाटक को लोकप्रिय बनाने का श्रेय सफ़दर हाशमी को जाता है। उन्होंने 1973 में 'जन नाट्य मंच' (JANAM) की स्थापना की।
प्रमुख नाटक:
'मशीन', 'औरत', 'हल्ला बोल', 'मत बाँटो इंसान को'।
राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस:
सफ़दर हाशमी की याद में 12 अप्रैल को मनाया जाता है।
5. हिंदी रंगमंच के महत्वपूर्ण तथ्य
प्रथम मंचित नाटक:
शीतलाप्रसाद त्रिपाठी कृत 'जानकी मंगल' (3 अप्रैल 1868)। इसमें भारतेंदु ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी।
प्रमुख संस्थाएं:
नेशनल थियेटर (बनारस, 1884), भारतेंदु नाटक मंडली (1906) और इप्टा (IPTA)।
स्त्री पात्र:
1939 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की 'विक्रम परिषद' ने पुरुषों के स्थान पर स्त्रियों द्वारा अभिनय की परंपरा शुरू की।
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MCQ
UGC NET हिंदी: अभ्यास प्रश्न-पत्र
प्रश्न 1. हिंदी एकांकी के उद्भव और विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
(i) जयशंकर प्रसाद कृत 'एक घूँट' (1929) को आधुनिक लक्षणों से युक्त प्रथम एकांकी माना जाता है।
(ii) डॉ. रामकुमार वर्मा को 'हिंदी एकांकी का जनक' स्वीकार किया जाता है।
(iii) भुवनेश्वर प्रसाद का एकांकी संग्रह 'कारवाँ' (1935) पाश्चात्य शिल्प से प्रभावित है।
(iv) 'हंस' पत्रिका का 'एकांकी नाटक विशेषांक' 1930 में प्रकाशित हुआ था।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(A) i, ii और iv
(B) i, ii और iii
(C) ii, iii और iv
(D) सभी सही हैं
उत्तर: (B) (व्याख्या: 'हंस' का एकांकी विशेषांक मई 1938 में प्रकाशित हुआ था, न कि 1930 में)।
प्रश्न 2. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित एकांकी संग्रहों का सही अनुक्रम क्या है?
(A) कारवाँ, पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई, पर्वत के पीछे
(B) पृथ्वीराज की आँखें, कारवाँ, रेशमी टाई, पर्वत के पीछे
(C) कारवाँ, रेशमी टाई, पृथ्वीराज की आँखें, पर्वत के पीछे
(D) पर्वत के पीछे, कारवाँ, रेशमी टाई, पृथ्वीराज की आँखें
उत्तर: (A) (व्याख्या: कारवाँ-1935, पृथ्वीराज की आँखें-1938, रेशमी टाई-1941, पर्वत के पीछे-1952)।
प्रश्न 3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
सूची-I (एकांकीकार) सूची-II (रचना)
(a) डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल (i) भोर का तारा
(b) जगदीशचंद्र माथुर (ii) अंडे के छिलके
(c) उपेंद्रनाथ अश्क (iii) पर्वत के पीछे
(d) मोहन राकेश | (iv) तौलिये |
कूट: (A) a-iii, b-i, c-iv, d-ii
(B) a-i, b-iii, c-ii, d-iv
(C) a-iii, b-iv, c-i, d-ii
(D) a-ii, b-i, c-iv, d-iii
उत्तर: (A)
प्रश्न 4. स्थापना (Assertion - A): नुक्कड़ नाटक आमतौर पर संक्षिप्त और सटीक होते हैं।
तर्क (Reason - R): क्योंकि सड़क किनारे खड़े दर्शकों को लंबे समय तक बांधकर रखना संभव नहीं होता है।
(A) A और R दोनों सही हैं, R, A की सही व्याख्या है।
(B) A सही है, लेकिन R गलत है।
(C) A गलत है, लेकिन R सही है।
(D) A और R दोनों गलत हैं।
उत्तर: (A)
प्रश्न 5. हिंदी रंगमंच के इतिहास के संबंध में कौन-सा युग्म असंगत है?
(A) प्रथम मंचित नाटक - जानकी मंगल (1868) (B) नेशनल थियेटर (बनारस) - 'अंधेर नगरी' का प्रथम मंचन (1884
(C) प्रथम नुक्कड़ नाटक शैली - अंधेर नगरी (1881)
(D) हिंदी रंगमंच का सूत्रपात - पारसी रंगमंच से (बलवंत गार्गी के अनुसार)
(E) सभी सही है।
उत्तर: (E)
प्रश्न 6. 'माच' (Maach) लोक नाट्य के संदर्भ में सही तथ्य पहचानें:
(i) यह मालवा (उज्जैन) का प्रमुख लोक नाट्य है। (ii) इसके शैली के आरंभकर्ता 'गुरु गोपालजी' माने जाते हैं।
(iii) इसमें 'स्वांग' और 'नकल' का पुट होता है।
(iv) यह मूलतः राजस्थान से आकर मालवा में विकसित हुआ।
(A) केवल i और ii
(B) i, ii और iii
(C) i, ii और iv
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर: (D)
प्रश्न 7. सफ़दर हाशमी और 'जनम' (JANAM) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा नाटक उनके द्वारा लोकप्रिय बनाया गया?
(A) मशीन, औरत, हल्ला बोल
(B) बकरी, कबीरा खड़ा बाजार में
(C) अंधा युग, आषाढ़ का एक दिन
(D) कल्पतरु, कोणार्क
उत्तर: (A)
प्रश्न 8. डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल ने अपने एकांकियों में किस शैली का प्रमुखता से प्रयोग किया है?
(A) पारसी शैली
(B) इब्सन की यथार्थवादी शैली
(C) लोक-नाट्य शैली
(D) संस्कृत नाट्य शैली
उत्तर: ©
प्रश्न 9. नुक्कड़ नाटक के तकनीकी पक्ष के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(A) इसमें दृश्य परिवर्तन नहीं होता है।
(B) कलाकार संकेतों के माध्यम से दृश्य परिवर्तन की सूचना देते हैं।
(C) इसमें मंच और दर्शकों के बीच एक स्पष्ट पर्दा होता है।
(D) इसका विषय जनसामान्य की ज्वलंत समस्याओं से जुड़ा होता है।
उत्तर: (C) (व्याख्या: नुक्कड़ नाटक में पर्दे या औपचारिक रंगमंच का अभाव होता है)।
प्रश्न 10. कालक्रम की दृष्टि से हिंदी रंगमंच की संस्थाओं का सही अनुक्रम क्या है?
(A) इप्टा (IPTA), नेशनल थियेटर, जन नाट्य मंच (JANAM)
(B) नेशनल थियेटर, इप्टा (IPTA), जन नाट्य मंच (JANAM)
(C) जन नाट्य मंच, इप्टा
, नेशनल थियेटर
(D) नेशनल थियेटर, जन नाट्य मंच, इप्टा
उत्तर: (B) (व्याख्या: नेशनल थियेटर-1884, इप्टा-1943 के आसपास सक्रिय, जनम-1973)।
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