हिंदी निबंध: उद्भव और विकास | UGC NET Hindi Notes | सम्पूर्ण व्याख्या

 हिन्दी निबंध साहित्य: उद्भव, विकास और महत्वपूर्ण पड़ाव



हिन्दी साहित्य में निबंध विधा का उद्भव और विकास आधुनिक काल की एक महत्वपूर्ण घटना है। गद्य की इस विधा को पश्चिम (अंग्रेजी) साहित्य की देन माना जाता है। 

जहाँ यूरोपीय निबंध का जनक फ्रेंच विद्वान मानतेन को माना जाता है, वहीं अंग्रेजी में लॉर्ड बेकन पहले निबंधकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। 

हिन्दी में निबंधों की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध से मानी जाती है और आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भारतेन्दु हरिश्चंद्र को इसका सूत्रपातकर्ता स्वीकार किया है।

कालखंड और प्रमुख निबंधकार

हिन्दी निबंध के इतिहास को अध्ययन की सुविधा के लिए चार प्रमुख युगों में विभाजित किया गया है:

1. भारतेन्दु युग (1850-1900 ई.): 

यह हिन्दी निबंध का प्रारंभिक युग था, जहाँ लेखकों में एक प्रकार की 'स्वच्छंदता' और 'मनमौजीपन' देखने को मिलता है।

बालकृष्ण भट्ट: 

इन्हें शुक्ल जी ने 'हिन्दी का स्टील' कहा है। इनके निबंधों का संग्रह 'भट्ट निबंधमाला' (दो भाग) में संकलित है। 

प्रमुख निबंध: 

'साहित्य जनसमूह के हृदय का विकास है'।


प्रताप नारायण मिश्र: 

इन्हें 'हिन्दी का एडीसन' कहा जाता है।

 इन्होंने 'ब्राह्मण' पत्रिका का संपादन किया और 'धोखा', 'दाँत', 'भौं' जैसे ललित निबंध लिखे।


भारतेन्दु हरिश्चंद्र:

 'भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है?', 'लेवी प्राण लेवी' और 'स्वर्ग में विचार सभा का अधिवेशन' इनके प्रसिद्ध निबंध हैं।


2. द्विवेदी युग (1900-1920 ई.):

 यह युग भाषा के परिष्कार और व्याकरणिक शुद्धता का युग था।

महावीर प्रसाद द्विवेदी: 

इन्होंने 'सरस्वती' के माध्यम से हिन्दी गद्य को संस्कारित किया। शुक्ल जी ने इनके निबंधों को 'बातों का संग्रह' कहा है। 

प्रमुख रचना: 'रसज्ञ रंजन'।


बालमुकुंद गुप्त:

 इनके 'शिवशंभु के चिट्ठे' (1904-05) तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड कर्जन पर तीखा व्यंग्य करते हैं।


अध्यापक पूर्ण सिंह:

 इन्होंने केवल छह निबंध लिखे, जिनमें 'आचरण की सभ्यता', 'मजदूरी और प्रेम' तथा 'सच्ची वीरता' अत्यंत प्रसिद्ध हैं।


3. शुक्ल युग (1920-1940 ई.):

 आचार्य रामचंद्र शुक्ल के आगमन से हिन्दी निबंध विधा अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची।


आचार्य रामचंद्र शुक्ल: 

इनका प्रसिद्ध ग्रंथ 'चिंतामणि' है, जिसके पहले भाग का प्रकाशन 1939 में हुआ (पूर्व में 'विचार वीथी' नाम से 1930 में)।

 शुक्ल जी ने निबंध को 'गद्य की कसौटी' माना है।


बाबू गुलाब राय: 'ठलुआ क्लब' और 'मेरी असफलताएँ' इनके प्रमुख निबंध संग्रह हैं।


4. शुक्लोत्तर युग और ललित निबंध (1940 से अब तक):

 इस युग में ललित निबंधों की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई।

हजारी प्रसाद द्विवेदी: 

ललित निबंध विधा के वास्तविक प्रस्थान बिंदु। 

प्रमुख संग्रह:

 'अशोक के फूल' (1948), 'कुटज' (1964) और 'आलोक पर्व' (1972)।


विद्यानिवास मिश्र:

 'छितवन की छाँह' (1953) और 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' (1974) इनके महत्वपूर्ण कार्य हैं।


कुबेरनाथ राय:

 'प्रिया नीलकंठी' (1968), 'रस आखेटक' (1970) और 'गंधमादन' (1972) के माध्यम से इन्होंने ललित निबंध को नई ऊंचाइयां दीं।




UGC NET के लिए निबंधों के प्रकाशन वर्ष याद रखने की ट्रिक


1. युग-आधारित कालक्रम (Timeline Trick)

सबसे पहले निबंधों को उनके युगों के अनुसार विभाजित करें, क्योंकि परीक्षा में अक्सर युगों के अनुसार मिलान आता है:

भारतेंदु युग (1850-1900 ई.):

 शुरुआती निबंध जैसे 'राजा भोज का सपना' (1839) और 'सुरसुरा निर्णय' (1840) इसी समय के हैं।

द्विवेदी युग (1900-1920 ई.): 

यहाँ 'शिवशंभु के चिट्ठे' (1904-05) को आधार बनाएँ।

शुक्ल युग (1920-1940 ई.): 

यह आचार्य शुक्ल के 'चिंतामणि' का समय है।

शुक्लोत्तर युग (1940 ई. से अब तक): 

हजारी प्रसाद द्विवेदी और ललित निबंधकारों का दौर।


2. 'चिंतामणि' श्रृंखला की ट्रिक (Step-by-Step sequence)

आचार्य शुक्ल के निबंधों के संग्रह 'चिंतामणि' के चार भागों को याद रखने के लिए इस क्रम का पालन करें:

आधार वर्ष (1930): सबसे पहले 'विचार वीथी' प्रकाशित हुई।

भाग 1 (1939): 'विचार वीथी' ही परिमार्जित होकर 'चिंतामणि' भाग-1 बनी।

भाग 2 (1945): शुक्ल जी की मृत्यु के बाद विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने संपादन किया।

भाग 3 (1983): नामवर सिंह द्वारा संपादित।

भाग 4 (2002/2004): कुसुम चतुर्वेदी और ओमप्रकाश सिंह द्वारा (इसमें 47 निबंध हैं)।

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3. ललित निबंधकारों की 'विकास यात्रा' ट्रिक

ललित निबंधों के वर्षों को उनके लेखकों के कालक्रम के अनुसार याद रखना आसान है:


हजारी प्रसाद द्विवेदी (प्रस्थान बिंदु): इनके निबंधों का क्रम 48-51-64-72 याद रखें।

1948 (अशोक के फूल) -> 1951 (कल्पलता) -> 1964 (कुटज) -> 1972 (आलोक पर्व)।

 ट्रिक: 'आलोक पर्व' पर 1973 में साहित्य अकादमी मिला, तो प्रकाशन एक साल पहले (1972) हुआ।


विद्यानिवास मिश्र (परंपरा का विस्तार): इनके शुरुआती निबंधों को '50 के दशक' से जोड़ें।

1953 (छितवन की छाँह) -> 1955 (हल्दी दूब) -> 1956 (कदम की फूली डाल) -> 1957 (तुम चंदन हम पानी)।

इनका सबसे प्रसिद्ध 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है' 1974 का है।

कुबेरनाथ राय (वैभव काल): इनके निबंधों की शुरुआत 1968 से होती है।

1968 (प्रिया नीलकंठी) -> 1970 (रस आखेटक) -> 1972 (गंधमादन) -> 1974 (निषाद बाँसुरी)।


4. महत्वपूर्ण 'प्रथम' और 'आधार' वर्ष

कुछ मील के पत्थर याद रखने से उनके आस-पास की अन्य रचनाओं का अंदाजा लग जाता है:

1868: भारतेंदु की 'कवि वचन सुधा' पत्रिका से निबंधों को बल मिला।

1904: आचार्य शुक्ल का पहला निबंध 'साहित्य' सरस्वती में छपा।

1909: शुक्ल जी का प्रसिद्ध निबंध 'कविता क्या है?' पहली बार प्रकाशित हुआ


1945: अज्ञेय का 'त्रिशंकु' और जैनेंद्र का 'जड़ की बात' इसी वर्ष के महत्वपूर्ण संग्रह हैं।

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https://drive.google.com/file/d/1kukEroTQYWePZawmoA_3mx-u486dGqM2/view?usp=drivesdk



-MCQ

प्रश्न 1. प्रकाशन वर्ष के अनुसार 'चिंतामणि' के विभिन्न भागों का सही अनुक्रम क्या है? 

(A) भाग-1 (1930), भाग-2 (1945), भाग-3 (1983), भाग-4 (2004)

 (B) भाग-1 (1939), भाग-2 (1945), भाग-3 (1983), भाग-4 (2004)

 (C) भाग-1 (1939), भाग-2 (1950), भाग-3 (1980), भाग-4 (2000) 

(D) भाग-1 (1935), भाग-2 (1945), भाग-3 (1985), भाग-4 (2010)


प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.आचार्य शुक्ल ने प्रताप नारायण मिश्र को 'हिन्दी का एडीसन' कहा है।

2.बालकृष्ण भट्ट को डॉ. लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय ने हिन्दी का प्रथम निबंधकार माना है। 

सही विकल्प चुनिए: 

(A) केवल 1 सही है

 (B) केवल 2 सही है

 (C) 1 और 2 दोनों सही हैं 

(D) दोनों गलत हैं


प्रश्न 3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए: | सूची-I (निबंधकार) सूची-II (निबंध संग्रह) 

(a) कुबेरनाथ राय (i) कल्पलता 

 (b) हजारी प्रसाद द्विवेदी (ii) प्रिया नीलकंठी 

 (c) विद्यानिवास मिश्र (iii) ठेले पर हिमालय 

 (d) धर्मवीर भारती (iv) तुम चंदन हम पानी 

कूट:

 (A) a-ii, b-i, c-iv, d-iii 

(B) a-i, b-ii, c-iii, d-iv 

(C) a-ii, b-iv, c-i, d-iii

 (D) a-iv, b-i, c-ii, d-iii


प्रश्न 4. 'शिवशंभु के चिट्ठे' किस पत्रिका में प्रकाशित हुए थे? 

(A) सरस्वती 

(B) हिन्दी प्रदीप 

(C) भरतमित्र 

(D) ब्राह्मण


प्रश्न 5. अध्यापक पूर्ण सिंह के निबंधों की संख्या कितनी है?

 (A) चार 

(B) छह 

(C) आठ 

(D) दस


प्रश्न 6. स्थापना (A): "यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसौटी है तो निबंध गद्य की कसौटी है।" 

तर्क (R): भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंधों में ही सबसे अधिक संभव है।

 (A) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। 

(B) (A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

 (C) (A) सही है, (R) गलत है। 

(D) (A) गलत है, (R) सही है।


प्रश्न 7. प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध संग्रहों का सही क्रम क्या है? 

(A) कुटज, अशोक के फूल, कल्पलता, आलोक पर्व (B) अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, आलोक पर्व (C) कल्पलता, अशोक के फूल, आलोक पर्व, कुटज (D) आलोक पर्व, कुटज, कल्पलता, अशोक के फूल


प्रश्न 8. निम्नलिखित में से कौन-सा निबंध आचार्य शुक्ल द्वारा रचित मनोविकार संबंधी निबंध नहीं है?

(A) उत्साह

 (B) करुणा

 (C) मजदूरी और प्रेम 

(D) लज्जा और ग्लानि


प्रश्न 9. 'बकलम खुद' (1951) किसका निबंध संग्रह है? 

(A) नामवर सिंह 

(B) रामविलास शर्मा

 (C) अज्ञेय 

(D) मुक्तिबोध


प्रश्न 10. निम्नलिखित निबंधकारों को उनके युग के साथ सुमेलित कीजिए:

1.बालकृष्ण भट्ट - (a) शुक्ल युग

2.अध्यापक पूर्ण सिंह - (b) भारतेन्दु युग

3.बाबू गुलाब राय - (c) शुक्लोत्तर युग

4.विवेकी राय - (d) द्विवेदी युग 

सही कूट: (A) 1-b, 2-d, 3-a, 4-c 

(B) 1-a, 2-b, 3-c, 4-d

(C) 1-b, 2-a, 3-d, 4-c

 (D) 1-c, 2-d, 3-b, 4-a


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उत्तर कुंजी: 1(B), 2(C), 3(A), 4(C), 5(B), 6(A), 7(B), 8(C), 9(A), 10(A).


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