एक कहानी यह भी: मन्नू भंडारी | UGC NET हिंदी इकाई 10 नोट्स

 

UGC NET हिंदी इकाई 10 एक कहानी यह भी मन्नू भंडारी शॉर्ट नोट्स और MCQ
एक कहानी यह भी — मन्नू भंडारी | UGC NET हिंदी इकाई 10 नोट्स एवं MCQ


एक कहानी यह भी: मन्नू भंडारी | UGC NET हिंदी इकाई 10 नोट्स

प्रिय विद्यार्थियों, आज हम यूजीसी नेट (UGC NET) हिन्दी परीक्षा की इकाई 10 (आत्मकथा, जीवनी तथा अन्य गद्य विधाएँ) के अंतर्गत संकलित मन्नू भंडारी की प्रसिद्ध कालजयी कृति 'एक कहानी यह भी' का परीक्षा-उन्मुख एवं सर्वांगपूर्ण मास्टर नोट्स बनाएंगे ।

इस संपूर्ण अध्याय को तथ्यात्मक, वैचारिक, संरचनात्मक और आलोचकीय दृष्टिकोण से वर्गीकृत किया गया है ताकि परीक्षा में कोई भी प्रश्न छूटने न पाए। अंत में नए NTA/UGC NET पैटर्न पर आधारित 10 अभ्यास प्रश्न व्याख्या सहित हल करेंगे।


1. लेखिका का जीवन-वृत्त एवं व्यक्तिगत तथ्य (Biographical 
Profile)

वास्तविक व आधिकारिक नाम: महेंद्र कुमारी (मैट्रिक/हाईस्कूल के 

प्रमाणपत्र पर यही आधिकारिक नाम दर्ज था, जो उनके पिता द्वारा रखा गया था)।

घर का पुकार नाम / लेखकीय नाम: मन्नू (साहित्य जगत में इसी नाम से विख्यात हुईं)।

जन्म: 3 अप्रैल 1931, भानपुरा गाँव, मंदसौर ज़िला (मध्य प्रदेश)।

निधन: 15 नवंबर 2021, गुरुग्राम (हरियाणा)।

पारिवारिक ढांचा (संयुक्त मारवाड़ी परिवार):

मन्नू जी अपने माता-पिता की सबसे छोटी (पाँचवीं) संतान थीं।

भाई-बहन क्रम:

शशि: सबसे बड़ी बहन (बचपन में ही विवाह हो गया था)।

प्रस कुमार: बड़े भाई।

वसंत कुमार: दूसरे बड़े भाई।

सुशीला: मन्नू जी से ठीक 2 साल बड़ी बहन (जिससे मन्नू जी की रंग-रूप को लेकर तुलना होती थी)।

मन्नू (महेंद्र कुमारी): सबसे छोटी संतान।

विवाह एवं दांपत्य जीवन:

पति: प्रसिद्ध कहानीकार, उपन्यासकार एवं 'हंस' पत्रिका के संपादक 

राजेंद्र यादव।

विवाह वर्ष: 1959 ई. (अंतरजातीय कोर्ट मैरिज)।

विवाह के गवाह: मन्नू जी की बहन सुशीला, बहनोई पराक्रम सिंह तथा मित्र भगवती प्रसाद।

पारिवारिक विरोध: इस विवाह से मन्नू जी के पिता सुख संपत राय

 अत्यधिक नाराज थे और वे जीवनभर अपने दामाद राजेंद्र यादव से

 नहीं मिले।

संतान: जून 1961 में पुत्री का जन्म, जिसका साहित्यिक नाम रचना

 तथा घर का नाम टिंकू रखा गया।

दांपत्य समझौता: दोनों ने "एक छत के नीचे दो स्वतंत्र/समानांतर जिंदगियां" जीने का समझौता किया था।

शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन:

बालीगंज शिक्षा सदन (कोलकाता): 1952 से 1961 तक

 (लगभग 9 वर्ष) अध्यापन एवं पुस्तकालयाध्यक्ष का कार्य 

(विद्यालय की मुखिया: पुष्पमई बोस)।

मिरांडा हाउस (दिल्ली विश्वविद्यालय): 1964 से 1991 तक (

27 वर्षों तक) हिंदी प्राध्यापिका के रूप में सेवा।

प्रेमचंद सृजनपीठ (उज्जैन): 1991 में सेवानिवृत्ति के बाद विष्णुकांत शास्त्री द्वारा चयन पर निदेशक पद संभाला।

पुरस्कार, सम्मान एवं ऐतिहासिक निर्णय:

व्यास सम्मान: वर्ष 2008 में 'के. के. बिड़ला फाउंडेशन' द्वारा

 'एक कहानी यह भी' (प्रकाशन 2007 ई.) के लिए प्रदान किया गया।

शलाका सम्मान: हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा वर्ष 2006-07 में।

पद्मश्री अस्वीकार करने की घटना: आपातकाल के दौरान वर्ष 1976 में तत्कालीन सरकार द्वारा दिए जाने वाले 'पद्मश्री' पुरस्कार को मन्नू जी ने राजनीतिक परिस्थितियों एवं सरकारी सेंसरशिप के विरोध स्वरूप विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया था।

अन्य पुरस्कार: 

रामकुमार गोयनका पुरस्कार ('महाभोज' हेतु), 

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान पुरस्कार ('महाभोज' हेतु), भारतीय भाषा

 परिषद सम्मान कोलकाता (1982), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद पुरस्कार 

(1991) आदि।

2. मन्नू भंडारी की सम्पूर्ण रचनावली एवं मीडिया रूपांतरण

(क) उपन्यास

1 इंच मुस्कान (1961 ई.): राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया सहयोगी उपन्यास। (पुरुष पात्र 'अमर' को राजेंद्र यादव ने तथा स्त्री पात्रों 'रंजना' व 'अमला' को मन्नू जी ने लिखा)।

आपका बंटी (1971 ई.): बाल-मनोविज्ञान एवं तलाकशुदा दंपत्ति के बच्चे की पीड़ा पर आधारित उपन्यास।

महाभोज (1979 ई. / 1969 ई.): प्रसिद्ध राजनीतिक यथार्थवादी उपन्यास।

स्वामी (1982 ई.): शरतचंद्र की कहानी का उपन्यासात्मक रूपांतरण।

(ख) कहानी संग्रह

मैं हार गई (1957 ई.): प्रथम कहानी संग्रह। (प्रथम प्रकाशित कहानी

 'मैं हार गई' 1957 में 'कहानी' पत्रिका में छपी)।

तीन निगाहों की एक तस्वीर (1959 ई.)।

यही सच है (1966 ई.)।

एक प्लेट सैलाब (1968 ई.)।

त्रिशंकु (1978 ई.)।

नायक खलनायक विदूषक (2002 ई.)।

(ग) नाटक एवं बाल साहित्य

नाटक: 'बिना दीवारों के घर' (1966 ई. - पारिवारिक तनाव पर), 

'महाभोज' (1982 ई. - नाट्य रूपांतरण)।

बाल साहित्य: 'आँखों देखा झूठ' (1976 ई. - कहानी संग्रह), 

'ऐसमाता' (1981 ई.), 'कलवा' (1982 ई.)।

(घ) फिल्म, नाटक एवं मीडिया रूपांतरण (परीक्षा हेतु अत्यंत
 महत्वपूर्ण)

'यही सच है' कहानी: प्रसिद्ध निर्देशक बासु चटर्जी ने इस पर 

सुपरहिट फिल्म 'रजनीगंधा' बनाई।

'एकेला आकाश' (बांग्ला/कहानी): बासु चटर्जी ने शबाना आज़मी 

और अमोल पालेकर को लेकर 'जीना यहाँ' फिल्म बनाई।

'त्रिशंकु' कहानी: मिरांडा हाउस व रचना संस्था (कोलकाता) 

द्वारा नाट्य मंचन; राजेंद्र यादव द्वारा दूरदर्शन हेतु फिल्म निर्माण।

'अकेली' व 'चश्मे' कहानी: कोलकाता की प्रसिद्ध 'अनामिका' संस्था 

द्वारा नाट्य मंचन ('अकेली' कहानी अजमेर की विधवा बुढ़िया 'सोमा बूआ' पर आधारित)।

'महाभोज' नाटक: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) में अमल अलाना 

और प्रेम मटियानी के निर्देशन में मंचन।

'रजनी' धारावाहिक: दूरदर्शन हेतु व्यावसायिक शिक्षा/ट्यूशन प्रथा के

 खिलाफ लिखा गया धारावाहिक।

3. 'एक कहानी यह भी' का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन

3.1 विधागत स्वरूप एवं शीर्षक की सार्थकता

विधा: आत्मकथ्य / संस्मरण (यह पारंपरिक उबाऊ ढाँचे वाली पूर्ण 

आत्मकथा नहीं है)।

प्रकाशन वर्ष: 2007 ई. (पुस्तकाकार: 2008 ई., राधाकृष्ण प्रकाशन, 

पृष्ठ: 216)।

लेखकीय वक्तव्य: लेखिका के अनुसार, "जिस तरह कहानी जिंदगी 

का एक अंश मात्र होती है, उसी तरह यह भी मेरी जिंदगी का टुकड़ा 

मात्र ही है।"

3.2 भौगोलिक एवं सामाजिक परिवेशगत यात्रा

भानपुरा (मध्य प्रदेश): जन्म स्थान।

इंदौर (मध्य प्रदेश): वैभव व खुशहाली का दौर। पिता सुख संपत राय

 कांग्रेसी, आर्यसमाजी, समाज सुधारक थे तथा घर में 8-10 विद्यार्थियों

 को रखकर मुफ्त पढ़ाते थे।

अजमेर (राजस्थान - ब्रह्मापुरी मोहल्ला): आर्थिक झटके के कारण

 इंदौर से अजमेर आगमन।

दो-मंजिला मकान विभाजन: ऊपरी मंज़िल पिता का साम्राज्य 

(किताबें, पत्रिकाएँ जैसे हरिजन, नवजीवन, इंटरनेशनल कमेंट्री,

 एशियाड बिखरी रहती थीं); निचली मंज़िल माँ और बच्चों का 

अभावग्रस्त संसार।

पड़ोस कल्चर: पूरा मोहल्ला एक घर की तरह था।

 बचपन के खेल: चतुलिया (पिट्ठू), लंगड़ी टांग, पकड़म-पकड़ाई, 

काली टीलो, पतंग उड़ाना, गुड्डे-गुड़ियों का ब्याह।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): एम.ए. के बाद बालीगंज शिक्षा सदन

 में अध्यापन।

दिल्ली: मिरांडा हाउस में 27 वर्षों तक अध्यापन।

3.3 प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण एवं अंतर्संबंध

पिता (सुख संपत राय भंडारी):

विरोधाभासी व्यक्तित्व: एक ओर बेहद कोमल, संवेदनशील, 

दरियादिल व देशभक्त; दूसरी ओर अत्यधिक क्रोधी, अहंवादी, 

शक्की और प्रतिष्ठाकाँक्षी।

कार्य: अजमेर में अंग्रेजी-हिंदी विषयवार शब्दकोश का निर्माण।

रसोईघर की अवधारणा: रसोईघर को वे 'भटियारखाना' कहते थे, 

क्योंकि उनका मानना था कि वहाँ रहने से व्यक्ति की क्षमता और

 प्रतिभा भट्टी में झोंक दी जाती है।

माँ (अनूप कुमारी):

अनपढ़, अत्यधिक धैर्यवान, धरती से अधिक सहनशील, समर्पित महिला।

पिता के हर जुल्म और अन्याय को अपना भाग्य मानती थीं। 

लेखिका ने माँ के इस दब्बू व लाचार रूप को अपना आदर्श

 मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया।

प्राध्यापिका डॉ. शीला अग्रवाल:

सावित्री गर्ल्स कॉलेज (अजमेर) में 1945 ई. में नियुक्त हिंदी प्राध्यापिका।

उन्होंने मन्नू जी के सांवलेपन की हीनभावना को मिटाया, चुनिंदा साहित्य 

पढ़ाया और उन्हें सड़कों की सक्रिय राजनीति (1946-47 के स्वाधीनता 

आंदोलन) में उतारा।

डॉ. अंबालाल जी:

पिता के अंतरंग मित्र व अजमेर के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति।

चौपड़ पर मन्नू जी का भाषण सुनकर पिता से बोले— "आई एम रियली 

प्राउड ऑफ यू... तुमने एक शेरनी को जन्म दिया है।"

कोमल कोठारी:

कोलकाता में मन्नू जी के पठन-पाठन का छूटा हुआ क्रम पुनः जोड़ने 

वाले विद्वान।

भैरव प्रसाद गुप्त:

'कहानी' पत्रिका के संपादक। मन्नू जी की कहानी 'अभिनेता' पर पत्र

 लिखा— "तुम्हारी यह कहानी तो ग्राफ के नीचे की ओर सरकने का 

संकेत कर रही है..."।

प्रसिद्ध कथन: "मन्नू भंडारी मेरी खोज है और राजेंद्र यादव की प्राप्ति।"

3.4 साहित्यिक अध्ययन का विकास क्रम (परीक्षा हेतु 
अति-महत्वपूर्ण कालक्रम)

लेखिका द्वारा डॉ. शीला अग्रवाल की प्रेरणा से पढ़ी गई पुस्तकों का क्रम:

जैनेंद्र कुमार: सुनीता (पसंद का दौर शुरू) तथा त्यागपत्र।

अज्ञेय: शेखर: एक जीवनी (पहली बार समझ नहीं आया, 

नदी के द्वीप पढ़ने के बाद दोबारा पढ़ने पर समझ आया)।

भगवतीचरण वर्मा: चित्रलेखा।

यशपाल: क्रांतिकारी विचार हेतु सबसे प्रिय लेखक 

(दादा कामरेड व पार्टी कामरेड पॉकेट मनी से खरीदी गई पहली पुस्तकें)।

4. परीक्षा-उपयोगी महत्वपूर्ण उद्धरण एवं आलोचकीय मत

"आगे बढ़ने से पहले एक बात अच्छी तरह स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि

 यह मेरी आत्मकथा कतई नहीं है इसलिए मैंने इसका शीर्षक भी 

एक कहानी यह भी रखा है।" — मन्नू भंडारी

"रसोई को पिताजी 'भटियारखाना' कहते थे... उनके हिसाब से वहाँ 

रहना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंकना था।" — मन्नू भंडारी

"शीला अग्रवाल ने साहित्य का दायरा ही नहीं बढ़ाया बल्कि उसे 

स्थितियों की सक्रिय भागीदारी में बदल दिया।" — मन्नू भंडारी

"तुम्हारी यह कहानी तो ग्राफ के नीचे की ओर सरकने का संकेत 

कर रही है; ध्यान रहे आगे से ऐसा न हो।" — भैरव प्रसाद गुप्त 

का पत्र (कहानी 'अभिनेता' पर)

"मन्नू भंडारी मेरी खोज है और राजेंद्र यादव की प्राप्ति।" — 

भैरव प्रसाद गुप्त

"सारे कॉलेज की लड़कियों पर इतना रोब है तेरा... सारा कॉलेज

 तुम तीन लड़कियों के इशारे पर चल रहा है।" — कॉलेज प्रिंसिपल

 के समक्ष पिता का गर्वोक्ति कथन

"अपनी मिट्टी को छोड़कर कोई रह सकता है क्या... यूँ अपनी 

माँ को छोड़कर कोई रह सकता है क्या?" — विभाजन के समय 

पड़ोसी रंगरेज़ बाबा के अश्रुपूरित वाक्य

"देखो छत ज़रूर हमारी एक होगी लेकिन ज़िंदगी अपनी-अपनी होगी... 

बिल्कुल स्वतंत्र, मुक्त और अलग।" — मन्नू-राजेंद्र यादव का विवाह 

पूर्व समझौता


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MCQs)

प्रश्न 1. [सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए]

सूची I (पात्र/व्यक्ति)

(A) डॉ. शीला अग्रवाल

(B) भैरव प्रसाद गुप्त

(C) डॉ. अंबालाल

(D) कोमल कोठारी

सूची II (संबद्ध तथ्य/कथन)

(I) 'कहानी' पत्रिका के संपादक जिन्होंने मन्नू जी को साहित्य की 

खोज माना।

(II) अजमेर के प्रतिष्ठित नागरिक जिन्होंने चौपड़ भाषण के बाद 

पिता को बधाई दी।

(III) सावित्री गर्ल्स कॉलेज की प्राध्यापिका जिन्होंने मन्नू जी को

 स्वाधीनता आंदोलन से जोड़ा।

(IV) कोलकाता में मन्नू जी के टूटे हुए पठन-पाठन के क्रम को 

पुनः जोड़ने वाले विद्वान।

कूट:

(1) A-III, B-I, C-II, D-IV

(2) A-I, B-III, C-IV, D-II

(3) A-III, B-II, C-I, D-IV

(4) A-II, B-IV, C-III, D-I

उत्तर: (1)

व्याख्या: डॉ. अंबालाल ने चौपड़ भाषण के बाद पिता से कहा— 

"आई एम रियली प्राउड ऑफ यू... तुमने एक शेरनी को जन्म दिया है"।

 प्रिंसिपल ने शिकायत में कहा था कि सारा कॉलेज तीन लड़कियों 

के इशारे पर चल रहा है। भैरव प्रसाद गुप्त ने मन्नू जी को साहित्य

 में अपनी खोज माना। रंगरेज़ बाबा ने विभाजन के समय मिट्टी 

का दर्द व्यक्त किया था।



प्रश्न 2. [कथन और कारण (Assertion-Reason)]

अभिकथन (A): मन्नू भंडारी ने 'एक कहानी यह भी' को पारंपरिक 

अर्थों में अपनी पूर्ण आत्मकथा मानने से इंकार किया है।

तर्क (R): इस कृति में उनके संपूर्ण जीवन का तिथिवार विवरण

 न होकर केवल उनके लेखकीय व्यक्तित्व के निर्माण,

 सामाजिक-राजनीतिक परिवेश और जीवन के महत्वपूर्ण अंशों 

का आत्मकथ्यात्मक आलेखन है।

सही विकल्प का चयन कीजिए:

(1) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

(2) (A) और (R) दोनों सही हैं परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

(3) (A) सही है परंतु (R) गलत है।

(4) (A) गलत है परंतु (R) सही है।

उत्तर: (1)

व्याख्या: दोनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। आज़ाद हिंद फ़ौज के मुकदमों 

के विरोध में मन्नू जी ने अजमेर बंद कराया। सावित्री कॉलेज ने

 मई 1947 में मन्नू भंडारी, सुशीला व कुमुद का प्रवेश बंद किया

 था और डॉ. शीला अग्रवाल को सस्पेंशन नोटिस दिया था।



प्रश्न 3. [बहु-विकल्पीय कूट आधारित प्रश्न]

मन्नू भंडारी की साहित्यिक एवं वैचारिक यात्रा के संदर्भ में निम्नलिखित

 कथनों पर विचार कीजिए:

(I) मन्नू जी के पिता अजमेर में रसोईघर को 'भटियारखाना' कहते थे।

(II) उन्होंने अपनी पॉकेट मनी से अज्ञेय के उपन्यास 'शेखर: एक जीवनी' 

और 'नदी के द्वीप' सबसे पहले खरीदे थे।

(III) मन्नू जी की पहली प्रकाशित कहानी 'मैं हार गई' वर्ष 1957 में 

'कहानी' पत्रिका में छपी थी।

(IV) आपातकाल (1976) के दौरान मन्नू जी ने सरकारी 

सेंसरशिप के विरोध में 'पद्मश्री' सम्मान अस्वीकार कर दिया था।

सही कूट का चयन कीजिए:

(1) केवल (I) और (II)

(2) केवल (I), (III) और (IV)

(3) केवल (II) और (IV)

(4) (I), (II), (III) और (IV) सभी

उत्तर: (2)

व्याख्या: कथन (III) असत्य है क्योंकि मन्नू जी ने अपनी पॉकेट

 मनी से अज्ञेय का नहीं, बल्कि यशपाल के उपन्यास 

'दादा कामरेड' और 'पार्टी कामरेड' खरीदे थे। 

शेष तीनों कथन (I, II, IV) सत्य हैं।




प्रश्न 4. [कालक्रमानुक्रम (Chronological Order)]

डॉ. शीला अग्रवाल की प्रेरणा से मन्नू भंडारी द्वारा पढ़े गए 

उपन्यासों का सही पाठ्य-क्रम कौन सा है?

(1) त्यागपत्र ➔ सुनीता ➔ नदी के द्वीप ➔ शेखर: एक जीवनी

(2) सुनीता ➔ त्यागपत्र ➔ शेखर: एक जीवनी ➔ नदी के द्वीप / चित्रलेखा

(3) चित्रलेखा ➔ शेखर: एक जीवनी ➔ सुनीता ➔ त्यागपत्र

(4) शेखर: एक जीवनी ➔ चित्रलेखा ➔ त्यागपत्र ➔ सुनीता

उत्तर: (1)

व्याख्या: शीला अग्रवाल की प्रेरणा से पढ़े गए उपन्यासों का अनुक्रम है: 

सबसे पहले सुनीता (B) ➔ शेखर: एक जीवनी (A) ➔ नदी के द्वीप (D) ➔ चित्रलेखा (C)।



प्रश्न 5. [कथन एवं पात्र पहचान]

"तुम्हारी यह कहानी तो ग्राफ के नीचे की ओर सरकने का संकेत 

कर रही है; ध्यान रहे आगे से ऐसा न हो।"

उपर्युक्त पत्र-कथन किस संपादक का है और मन्नू भंडारी की 

किस कहानी के संदर्भ में कहा गया था?

(1) अज्ञेय — 'यही सच है' के संदर्भ में

(2) राजेंद्र यादव — 'त्रिशंकु' के संदर्भ में

(3) भैरव प्रसाद गुप्त — 'अभिनेता' कहानी के संदर्भ में

(4) अमृत राय — 'मैं हार गई' के संदर्भ में

उत्तर: (3)

व्याख्या: यह पत्र-कथन संपादक भैरव प्रसाद गुप्त ने 'कहानी' 

पत्रिका में भेजी गई मन्नू जी की तीसरी कहानी 'अभिनेता' के

 संदर्भ में लिखा था।






प्रश्न 6. [सुमेलित कीजिए: रचनाएँ एवं मीडिया/फिल्म रूपांतरण]

सूची I (कहानी/रचना)

(A) यही सच है


(B) एकेला आकाश


(C) 1 इंच मुस्कान


(D) अकेली

सूची II (रूपांतरण/विशेषता)

(I) बासु चटर्जी द्वारा निर्मित फिल्म 'जीना यहाँ'


(II) बासु चटर्जी द्वारा निर्मित प्रसिद्ध फिल्म 'रजनीगंधा'


(III) अनामिका संस्था द्वारा नाट्य मंचन (सोमा बूआ पात्र)


(IV) राजेंद्र यादव के साथ रचित सहयोगी उपन्यास

कूट:

(1) A-II, B-I, C-IV, D-III

(2) A-I, B-II, C-III, D-IV

(3) A-III, B-IV, C-I, D-II

(4) A-II, B-III, C-IV, D-I

उत्तर: (1)

व्याख्या: 'यही सच है' पर बासु चटर्जी ने 'रजनीगंधा' फ़िल्म बनाई।

 'एकेला आकाश' पर 'जीना यहाँ' बनी।

 '१ इंच मुस्कान' राजेंद्र यादव के साथ सहयोगी उपन्यास है। 

'अकेली' कहानी सोमा बूआ पर आधारित है।





प्रश्न 7. [कथन I और कथन II का मूल्यांकन]

कथन I: मन्नू भंडारी का विवाह वर्ष 1959 में राजेंद्र यादव से हुआ, 

जिसके गवाह उनकी बहन सुशीला, बहनोई पराक्रम सिंह और

 भगवती प्रसाद थे।

कथन II: मन्नू भंडारी के पिता इस अंतरजातीय विवाह से 

अत्यधिक प्रसन्न थे और उन्होंने स्वयं अजमेर में शादी का

 भव्य आयोजन किया था।

सही विकल्प चुनिए:

(1) कथन I और कथन II दोनों सही हैं।

(2) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।

(3) कथन I सही है, किंतु कथन II गलत है।

(4) कथन I गलत है, किंतु कथन II सही है।

उत्तर: (1)

व्याख्या: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सत्य हैं और (R),

 (A) की सही व्याख्या करता है। मन्नू जी ने अपनी माँ के प्रति प्रेम 

और सहानुभूति रखते हुए भी उनके व्यक्तित्वहीन और दब्बू स्वभाव

 को आदर्श मानने से इंकार किया था।





प्रश्न 8. [बहु-विकल्पीय कूट प्रश्न]

'एक कहानी यह भी' के संदर्भ में मन्नू भंडारी के पारिवारिक 

जीवन से जुड़े कौन से तथ्य सही हैं?

(I) उनका जन्म मंदसौर ज़िले के भानपुरा गाँव में हुआ था।

(II) उनके पिता सुख संपत राय ने अजमेर में अंग्रेजी-हिंदी 

शब्दकोश का कार्य पूरा किया था।

(III) मन्नू जी की माँ अत्यधिक शिक्षित, आधुनिक और विद्रोही 

विचारों की महिला थीं।

(IV) मन्नू जी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज

 में 27 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया।

सही कूट का चयन कीजिए:

(1) केवल (I), (II) और (IV)

(2) केवल (II) और (III)

(3) केवल (I) और (III)

(4) (I), (II), (III) और (IV) सभी

उत्तर: (4)

व्याख्या: चारों कथन (I, II, III, IV) पूर्णतः प्रामाणिक और सत्य हैं।




प्रश्न 9. [कथन और कारण (Assertion-Reason)]

अभिकथन (A): मन्नू भंडारी ने अपनी माँ के सहनशील, त्यागी 

और दब्बू स्वभाव को जीवन में कभी अपना आदर्श नहीं माना।

तर्क (R): माँ पिता के हर अत्याचार व अन्याय को अपना भाग्य 

मानकर स्वीकार कर लेती थीं, जिसे मन्नू जी ने असहायता और 

व्यक्तित्वहीनता माना।

सही विकल्प का चयन कीजिए:

(1) (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

(2) (A) और (R) दोनों सही हैं परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।

(3) (A) सही है परंतु (R) गलत है।

(4) (A) गलत है परंतु (R) सही है।

उत्तर: (3)

व्याख्या: कथन I सत्य है। कथन II असत्य है क्योंकि मन्नू जी के 

पिता इस अंतरजातीय विवाह से अत्यधिक नाख़ुश थे और 

जीवनभर राजेंद्र यादव से नहीं मिले।







प्रश्न 10. [सुमेलित कीजिए: पुरस्कार/सम्मान एवं वर्ष]

सूची I (पुरस्कार/घटना)

(A) व्यास सम्मान


(B) पद्मश्री अस्वीकार


(C) शलाका सम्मान


(D) 'एक कहानी यह भी' पुस्तकाकार प्रकाशन


सूची II (वर्ष)

(I) 1976 ई.


(II) 2008 ई.


(III) 2006-07 ई.


(IV) 2008 ई. (राधाकृष्ण प्रकाशन)

कूट:

(1) A-II, B-I, C-III, D-IV

(2) A-I, B-II, C-IV, D-III

(3) A-III, B-I, C-II, D-IV

(4) A-IV, B-III, C-I, D-II

उत्तर: (1)

व्याख्या: व्यास सम्मान 2008 ई. में मिला; 

पद्मश्री 1976 ई. में अस्वीकार किया; 

शलाका सम्मान 2006-07 ई. में मिला; 

और प्रथम कहानी संग्रह 'मैं हार गई' 1957 ई. में प्रकाशित हुआ।

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ये लेख आपको कैसा लगा कमेंट में लिखे जी। 

धन्यवाद।

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